प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर से हावड़ा के बीच 105 किलोमीटर ट्रैक को कवच प्रणाली से लैस कर दिया गया है। कवच लोको पायलट को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन चलाने में मदद करता है। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है। इसे देश में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है।
यात्री ट्रेनों में पहला क्षेत्र परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू हुआ और जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली के रूप में अपनाया गया। कवच एक जटिल प्रणाली है जिसमें लोको कवच, स्टेशन कवच, दूरसंचार टावर, ट्रैक की पूरी लंबाई में आरएफआईडी टैग आदि घटक होते हैं।
दोनों स्टेशनों के बीच हर माह 50 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। भागलपुर से हावड़ा जाने के लिए 5 ट्रेनें चलती हैं। जिसमें एक वंदे भारत एक्सप्रेस है। हावड़ा से वर्धमान तक के रूट को कवच से कवर किया गया है। जिससे लाखों यात्रियों को सुरक्षा दी जा रही है। पूर्व रेलवे का यह रूट भागलपुर से हावड़ा के बीच का है और इसका फायदा बिहार से हावड़ा तक जाने वाली ट्रेनों को भी मिल रहा है।
- यदि ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है
- इसे देश में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है
- हर माह भागलपुर से हावड़ा के बीच करते हैं 50 हजार यात्री करते हैं सफर
हावड़ा से वर्धमान के बीच जो कवच प्रणाली है वो आधुनिक माडल 4.0 की है। बालासोर के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे के बाद पूर्व रेलवे ने सुरक्षा पर काम बढ़ा दिया है। जिन रूटों पर सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां की समीक्षा की जा रही है। कवच की सुरक्षा यूपी से राजस्थान के मथुरा-नागदा (549 मार्ग किमी) के बाद सबसे ज्यादा 105 किमी पूर्व रेलवे के इस हिस्से का है।
भागलपुर से हावड़ा के बीच जयनगर-हावड़ा एक्सप्रेस कहलगांव, साहिबगंज, वर्धमान होकर जाती है। कविगुरु व वंदे भारत एक्सप्रेस हंसडीहा, दुमका, वर्धमान होकर हावड़ा जाती है। गया-हावड़ा व जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस साहिबगंज से वर्धमान होकर हावड़ा जाती है।
जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस से 24 नवंबर तक 28138, कविगुरु एक्सप्रेस से 3933 और वंदे भारत से 10357 यात्री भागलपुर से हावड़ा के लिए गए। इसी तरह जयनगर-हावड़ा और गया-हावड़ा एक्सप्रेस से करीब 7600 से अधिक यात्री गए हैं। ये आंकड़ा आरक्षण करा के सफर करने वाले यात्रियों का है। |
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