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पुराने आंकड़े फेल, अब बदलेगा प्रदूषण का गणित... दिल्ली-एनसीआर के लिए बनेगी नई उत्सर्जन सूची

deltin33 2026-1-22 14:26:55 views 1241
  

दिल्ली-एनसीआर के लिए नए सिरे से तैयार होगी उत्सर्जन सूची। फाइल फोटो



संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। पुणे स्थित आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआइ) के नेतृत्व में चार संस्थानों का समूह- आइआइटी दिल्ली, ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) और आइआइटीएम पुणे दिल्ली समेत एनसीआर के लिए एक नई उत्सर्जन सूची और स्रोत निर्धारण अध्ययन तैयार करेगा।

10 फरवरी तक इस पर जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। याद रहे कि तीन जनवरी के ही अंक में जागरण ने \“\“पांच वर्ष पुरानी उत्सर्जन सूची के आधार पर बता रहे हैं प्रदूषकों की हिस्सेदारी\“\“ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।



वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इस अध्ययन व सूची में 2026 को आधार वर्ष मानते हुए प्रमुख प्रदूषणकारी क्षेत्रों को कवर करने के लिए उच्च रिजोल्यूशन पर उत्सर्जन का मानचित्रण करने का निर्देश दिया है।
पूर्वानुमान में होगा सुधार

सीएक्यूएम के मुताबिक नई उत्सर्जन सूची को वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस) और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के साथ एकीकृत किया जाएगा ताकि वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान में सुधार हो सके। साथ ही प्रदूषण से जंग में भी अधिक प्रभावी रणनीतियां तैयार करने में मदद मिल सके।

  

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सीएक्यूएम अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली एवं एनसीआर के लिए उत्सर्जन सूची और स्रोत विभाजन का एक ढांचा विकसित करने के लिए पिछले साल अप्रैल में विशेषज्ञों की समिति का भी गठन किया गया था। समिति ने 2015 से 2025 के बीच किए गए पिछले स्रोत विभाजन अध्ययनों का सारांश प्रस्तुत करते हुए सीएक्यूएम ने स्पष्ट मौसमी भिन्नताओं को भी नोट किया।

अधिकारियों ने बताया कि इस उत्सर्जन सूची में हालिया गतिविधि डेटा, बेहतर कार्यप्रणाली और चल रहे नीतिगत उपायों को शामिल किया जाएगा ताकि उत्सर्जन का अधिक सटीक आकलन किया जा सके।

  

उत्सर्जन का उपयोग पूर्वानुमान माडलिंग के लिए किया जाएगा.. ताकि स्रोत विभाजन को और मजबूत किया जा सके और प्रदूषण स्रोतों के वास्तविक समय आकलन में सुधार किया जा सके।
नई उत्सर्जन सूची और स्रोत निर्धारण अध्ययन में इन आंकड़ों और तथ्यों को भी रखा जाएगा ध्यान में:-
सर्दियों में प्रदूषकों की हिस्सेदारी

  • गैसीय उत्सर्जन से निर्मित द्वितीयक कण पदार्थ: 27 प्रतिशत
  • परिवहन: 23 प्रतिशत
  • बायोमास: 20 प्रतिशत
  • धूल: 15 प्रतिशत
  • उद्योग: 09 प्रतिशत
  • अन्य स्रोत: 06 प्रतिशत

गर्मियों में प्रदूषकों की हिस्सेदारी

  • धूल: 27 प्रतिशत
  • परिवहन: 19 प्रतिशत
  • द्वितीयक कण पदार्थ: 17 प्रतिशत
  • उद्योग: 14 प्रतिशत
  • बायोमास: 12 प्रतिशत
  • अन्य स्रोत: 11 प्रतिशत


1. मौजूदा प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रणाली टेलपाइप से निकलने वाले कण पदार्थ (पीएम) की निगरानी नहीं करती, यह उत्सर्जन का सही प्रतिनिधित्व भी नहीं करती।

2. अनधिकृत या परिधीय क्षेत्रों में संचालित होने वाली छोटी और असंगठित इकाइयों की उपस्थिति के कारण कार्रवाई एक चुनौती है। प्लास्टिक और रबर जैसे गैर-हानिकारक औद्योगिक कचरे के अवैध दहन और अनियंत्रित उत्सर्जन से औद्योगिक प्रदूषण और बढ़ता है।

3. निर्माण और विध्वंस गतिविधियों का मलबा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में उत्पन्न होता है और अक्सर सड़कों और खुले क्षेत्रों के पास अवैध रूप से डंप किया जाता है। इससे कण पदार्थ प्रदूषण में काफी वृद्धि होती है।

4. अविश्वसनीय ग्रिड बिजली आपूर्ति से एनसीआर में डीजल जनरेटर सेटों का उपयोग काफी बढ़ गया है। क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर परिचालन भी प्रदूषण में योगदान देता है, मुख्य रूप से उड़ान गतिविधियों के दौरान गैसीय प्रदूषकों के उत्सर्जन के कारण। होटलों और रेस्तरां की ठोस ईंधन पर निर्भरता और उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली की कमी भी प्रदूषण के मुख्य स्रोत के रूप में पहचानी गई है।

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