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IIT Kanpur शोधार्थी आत्महत्या मामला: पोस्टमार्टम में कूल्हा, कंधा, सिर सहित 10 से अधिक हड्डियां टूटीं, परिवार ने जांच की उठाई मांग

Chikheang 1 hour(s) ago views 673
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। IIT Kanpur Research Scholar Suicide: आईआईटी कैंपस की छठवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाले शोधार्थी के कूल्हा, कंधा, एक हाथ, दोनों पैर व सिर की समेत 10 से ज्यादा हड्डियां टूटी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, कोमा में जाने से उनकी मौत हुई। वहीं, दिवंगत के चचेरे भाई ने बताया कि राम स्वरूप पढ़ाई में होनहार था, लेकिन पता नहीं आइआइटी में ऐसा क्या तनाव था, जिसकी वजह से उसने ये आत्मघाती कदम उठा लिया। आईआईटी प्रशासन इसकी गंभीरता से जांच कराए।


राजस्थान के चुरू जिले में विद्यासागर के गिरिवरसर निवासी 28 वर्षीय रामस्वरूप ईशराम डिपार्टमेंट आफ अर्थ साइंस में पीएचडी कर रहे थे। मंगलवार को उन्होंने कैंपस की छठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह काफी समय से एंजाइटी की बीमारी ग्रसित थे। चचेरे भाई राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि रामस्वरूप राजस्थान एक रिसर्च के लिए अपने साथी के साथ गए थे। वहां से वह घर गए और रविवार को तीन माह की गर्भवती पत्नी मंजू व बेटी चारू को लेकर आईआईटी आ गए थे।

मंगलवार को उन्होंने पत्नी से कहा कि वह लैब जा रहे हैं तो पत्नी ने खाना खाने की बात कही। इसके बाद वह बोले कि थोड़ा टहल लें। इसके बाद बालकनी में जाकर नीचे कूद गए। राजेन्द्र के मुताबिक, रामस्वरूप ने पहले ही प्रयास में आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया था। वह वह एक बेहतरीन एथलीट भी था। उसने जिस तरीके से आत्महत्या की है। उससे लगता है कि वह बहुत ज्यादा तनाव में था। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद स्वजन शव लेकर गांव के लिए निकल गए।
मानवाधिकार आयोग को जवाब देगा आईआईटी

आईआईटी में लगातार हो हीं आत्महत्याओं को लेकर संस्थान गुरुवार को मानवाधिकार आयोग के सामने अपना पक्ष रखेगा। सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर पंकज कुमार सिंह ने वर्ष 2024 में आईआईटी में बढ़ती आत्महत्याओं के संदर्भ में याचिका दायर की थी। मानवाधिकार आयोग में दायर याचिका पर डिपार्टमेंट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी (डीएसटी) के सचिव और आईआईटी निदेशक को 22 जनवरी को याची की आपत्तियों पर जवाब देने के आदेश हैं। वहीं इस मामले में आईआईटी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया।

पंकज ने याचिका में कहा है कि अब तक संस्थान की ओर से आयोग को जो जवाब दिए गए हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि रिट दायर करने के बाद से अब तक तीन घटनाएं हुई हैं, जिसे बाद में जोड़ा गया। यह सिलसिला रुक नहीं रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2024 से मानवाधिकार आयोग में चल रहे आत्महत्याओं के मामले में अक्टूबर में नई याचिका दायर कर धीरज सैनी की आत्महत्या को शामिल करने का आग्रह किया गया था।
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