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रेडियोलॉजी जांच के फर्जी बिलों की होगी स्क्रूटनी, रिम्स और एमजीएम समेत सभी अस्पतालों को निर्देश

cy520520 2026-1-21 22:57:34 views 613
  

एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड अस्‍पताल।


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित रेडियोलॉजी सेवाओं (जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई) में संभावित अनियमितताओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों को निजी एजेंसियों द्वारा जमा किए गए बिलों की बारीकी से जांच करने का आदेश दिया है।   
एक सप्ताह के भीतर मांगी गई रिपोर्ट स्वास्थ्य निगम ने निर्देश दिया है कि केवल उन्हीं जांचों का भुगतान किया जाए, जो वास्तव में मरीजों द्वारा खर्च की गई हैं। अधिकारियों को जांच की तारीख, मरीजों के रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट का मिलान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।    विभाग का लक्ष्य फर्जी, गलत या बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिलों के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकना है। रांची के रिम्स, जमशेदपुर के एमजीएम, धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज सहित सभी जिलों के सिविल सर्जनों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।   
जमशेदपुर एमजीएम: बिना करार के चल रहा सेंटर जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थिति और भी पेचीदा हो गई है। यहां रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही एजेंसी \“हेल्थ मैप\“ का करार पिछले महीने ही समाप्त हो चुका है।    अस्पताल प्रशासन द्वारा काम बंद करने के निर्देश के बावजूद सेंटर का संचालन जारी है। एजेंसी के प्रतिनिधियों का दावा है कि सरकार के साथ नया करार हो चुका है, लेकिन एमजीएम प्रबंधन का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पत्र या लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।   
नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों और इस प्रक्रिया में ढिलाई बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में फर्जी बिलिंग या बिना वैध करार के सेवाएं चलाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी का भुगतान रोकने के साथ-साथ उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।   
जानिए जांच के मुख्य बिंदु

  •     सत्यापन: क्या बिल में दर्ज मरीज वास्तव में अस्पताल में भर्ती या ओपीडी का हिस्सा था?
  •     रिकॉर्ड मिलान: जांच की तारीख और रिपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच।
  •     करार की स्थिति: क्या एजेंसियां वैध एग्रीमेंट के तहत काम कर रही हैं?


एजेंसी को बंद करने का आदेश दिया गया है। इसके बावजूद अगर जांच हो रही है, तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी, उपाधीक्षक, एमजीएम
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