जीआरएसई द्वारा निर्मित एडवांस्ड युद्धपोत आइएनएस विंध्यगिरि, जिसे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने अगस्त 2023 में कोलकाता में लांच किया था।
जयकृष्ण वाजपेयी, जागरण, कोलकाता। हमारी समुद्री सीमाओं की रक्षा केवल रणनीति का विषय नहीं, बल्कि शौर्य, वीरता और आत्मबल की निरंतर परीक्षा है। जब लहरों के बीच खड़ा एक युद्धपोत दुश्मन की हर आहट पर चौकन्ना रहता है, तो उसके पीछे एक राष्ट्र की इच्छाशक्ति, तकनीकी सामर्थ्य और सैनिक साहस काम करता है।
आज देश का यह शौर्य केवल रणभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि जहाज निर्माण यार्डों से लेकर दूर समुद्र तक अपनी गूंज सुना रहा है। कोलकाता के हुगली तट पर स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) उसी शौर्य का आधुनिक प्रतीक बन चुका है, जहां हथियार केवल ढाले नहीं जाते, बल्कि देश की सुरक्षा का आत्मविश्वास गढ़ा जाता है।
यह केवल एक शिपयार्ड नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की समुद्री सुरक्षा का ध्रुवतारा बन चुका है। हम उस दौर को पीछे छोड़ आए हैं, जब हथियारों और युद्ध में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के लिए हमें दूसरे देशों की ओर देखना पड़ता था। आज हम न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर रहे हैं, बल्कि दुनिया को भी भरोसेमंद विकल्प दे रहे हैं। यही बदलाव भारत के बढ़ते कद और मजबूत संकल्प की सबसे ठोस पहचान है।
हम गर्व से कहते हैं कि जीआरएसई की यात्रा ‘खरीदार से निर्माता’ बनने की भारत की ऐतिहासिक छलांग है। वर्ष 1961 में पहले स्वदेशी युद्धपोत आइएनएस अजय की सुपुर्दगी से लेकर वर्ष 2025 में एक ही साल में पांच अत्याधुनिक युद्धपोतों की डिलीवरी तक-यह संस्थान हमारी सामरिक सोच का प्रतिबिंब बन गया है।
आज 115 युद्धपोतों को बनाने का रिकार्ड किसी भी भारतीय शिपयार्ड के लिए उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की मुहर है। स्टेल्थ तकनीक से लैस आइएनएस नीलगिरी, तटीय जल में पनडुब्बी रोधी क्षमता से सुसज्जित आइएनएस अर्नला और गहरे समुद्र की मैपिंग करने वाला आइएनएस संध्याक-ये केवल जहाज नहीं, बल्कि हमारी संप्रभुता के चलते-फिरते प्रतीक हैं।
तकनीकी अनुसंधान और स्वदेशी शक्ति का संगम
हमारी असली ताकत तकनीकी आत्मनिर्भरता में है। जीआरएसई की सबसे बड़ी सफलता उसकी 70 से 90 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री का उपयोग है। अपनी \“वर्चुअल रियलिटी लैब\“ के जरिये डिजिटल खाका तैयार करने से लेकर एआइ-आधारित मेंटेनेंस तक, यह संस्थान अत्याधुनिक तकनीक का केंद्र बन चुका है। यह अब तक 115 युद्धपोत बनाकर सौंप चुका है, जो किसी भी भारतीय शिपयार्ड के लिए एक कीर्तिमान है।
बीते पांच वर्षों में गार्डन रीच ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को कई महत्वपूर्ण पोत सौंपे हैं। इनमें आधुनिक स्टेल्थ श्रेणी के फ्रिगेट, पनडुब्बी रोधी उथले जलपोत, बड़े सर्वेक्षण जहाज और गश्ती पोत शामिल हैं। केवल पिछले एक वर्ष में ही एक साथ कई जहाजों का जलावतरण और सुपुर्दगी इस शिपयार्ड की उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता को दर्शाती है।
लक्ष्य और भी बढ़ा किया तय
वर्तमान अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (रिटायर्ड) पीआर हरि के कुशल नेतृत्व में जीआरएसई अपने \“स्वर्णिम युग\“ में है। उनके कार्यकाल में शिपयार्ड ने वित्त वर्ष 2024-25 में 5,076 करोड़ रुपये के परिचालन राजस्व का ऐतिहासिक स्तर छुआ, जो पिछले 65 वर्षों का रिकार्ड है। कंपनी का शुद्ध लाभ 48 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 527 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
2020 से 2025 के बीच जीआरएसई ने रक्षा उत्पादन में अभूतपूर्व तेजी दिखाई है। इस दौरान नौसेना और तटरक्षक बल को लगभग 10 प्रमुख पोत सौंपे गए। इसमें \“संध्याक\“ श्रेणी के बड़े सर्वेक्षण पोत और \“अर्नला\“ श्रेणी के एंटी-सबमरीन जहाज शामिल हैं। विशेष रूप से 2025 में अकेले पांच युद्धपोतों की डिलीवरी की सूचना ने संस्थान की कार्यक्षमता को सिद्ध किया है।
कमोडोर हरि के नेतृत्व में जीआरएसई की समवर्ती जहाज निर्माण क्षमता 20 से बढ़कर 24 हो चुकी है, जिसे 2026 तक 2028 और इस दशक के अंत तक 30 जहाजों तक ले जाने की योजना है। सीएमडी कमोडोर पीआर हरि का स्पष्ट संदेश है-\“हमारा लक्ष्य जीआरएसई को केवल एक जहाज निर्माता नहीं, बल्कि एक स्मार्ट, भविष्य-तैयार वैश्विक शिपयार्ड बनाना है-जो ‘मेक इन इंडिया, मेक फार द वर्ल्ड’ के विजन को साकार करे।
\“ग्रीन शिपिंग\“ के क्षेत्र में भी रखेंगे कदम
जीआरएसई के पास सितंबर 2025 तक 20,200 करोड़ रुपये से अधिक का \“आर्डर\“ मिला हुआ है। अगले पांच वर्षों में 30 से अधिक जहाजों के निर्माण का लक्ष्य है, जिनमें \“नेक्स्ट जनरेशन कार्वेट्स\“ (एनजीसी) और पी17ए श्रेणी के स्टेल्थ फ्रिगेट्स (हिमगिरि, विंध्यगिरि) प्रमुख हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वेसल्स और \“ग्रीन शिपिंग\“ के क्षेत्र में कदम रखना है।
नीली अर्थव्यवस्था और सामरिक भविष्य की मजबूत नींव
भारत अब केवल रक्षा आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बन चुका है। जीआरएसई ने मारीशस को \“सीजीएस बैराकुडा\“, गुयाना को समुद्री मालवाहक जहाज और सेशेल्स जैसे देशों को पोत निर्यात कर वैश्विक स्तर पर भारत की साख मजबूत की है। यह शिपयार्ड न केवल लोहे और इंजन से जहाज गढ़ रहा है, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था और सामरिक भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार कर रहा है।
यह कहानी आत्मनिर्भर भारत के उस विश्वास की प्रतीक है, जो अब समुद्र की लहरों पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। जीआरएसई न केवल कोलकाता के औद्योगिक गौरव को पुनर्स्थापित कर रहा है, बल्कि यह सुनिश्चित कर रहा है कि भविष्य के समुद्री युद्धों में भारत की जीत \“स्वदेशी हथियारों\“ से ही सुनिश्चित हो।
मैं स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल सीमाओं पर तैनात बलों तक सीमित नहीं समझा जा सकता। यह बाह्य, आंतरिक, ऊर्जा और साइबर सुरक्षा सहित सभी आयामों का समग्र ढांचा है। हमें तकनीक, नवाचार और स्वदेशी क्षमता के सहारे देश को सुरक्षित बनाना है।- जनरल डा. वीके सिंह (सेवानिवृत्त) |