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बांग्लादेश में बढ़ती सुरक्षा चिंता, भारत ने ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 78

नई दिल्‍ली: बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच भारत ने एक अहम और एहतियाती कदम उठाया है। नई दिल्ली ने मंगलवार को बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और अन्य सरकारी अधिकारियों के परिवारों को स्वदेश लौटने की सलाह दी है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने में कुछ ही सप्ताह शेष हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता तथा चरमपंथी गतिविधियों को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं।  




  
चुनाव से पहले एहतियाती कदम  




आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह एहतियात के तौर पर लिया गया है। भारत सरकार का कहना है कि बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग और अन्य दूतावास पूरी तरह खुले हैं और सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों के आश्रितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें भारत लौटने की सलाह दी गई है। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी तत्काल खतरे की खुफिया जानकारी पर आधारित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय हालात और आने वाले चुनावों को देखते हुए एक सतर्क कदम है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार कब तक भारत में रहेंगे।




  
भारत के राजनयिक मिशन और चौकियां  




भारत के बांग्लादेश में व्यापक राजनयिक नेटवर्क हैं। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भारत के सहायक दूतावास (कांसुलेट) कार्यरत हैं। इन सभी मिशनों को खुले रखने और सामान्य सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय नागरिकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए बांग्लादेशी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।




  
गैर-पारिवारिक गंतव्य घोषित  


सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए भारत ने बांग्लादेश को भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए ‘गैर-पारिवारिक गंतव्य’ घोषित करने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि भविष्य में भी अधिकारियों की तैनाती अकेले होगी और उनके परिवारों को वहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले से ही भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए गैर-पारिवारिक गंतव्य घोषित है। बांग्लादेश को इस श्रेणी में शामिल किया जाना भारत की गंभीर सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।




  
चरमपंथी गतिविधियों से बढ़ी चिंता  




हाल के महीनों में बांग्लादेश में चरमपंथी और कट्टरपंथी तत्वों की गतिविधियों में वृद्धि की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, चुनावी माहौल में इन समूहों के सक्रिय होने की आशंका अधिक रहती है। भारतीय प्रतिष्ठानों और कर्मियों को लेकर संभावित खतरों के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी बयानबाजी और कुछ संगठनों की आक्रामक भाषा ने भी चिंताओं को बढ़ाया है।

  
राजनीतिक बदलाव के बाद बिगड़े संबंध  


भारत और बांग्लादेश के संबंध अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार सत्ता में आई। नई सरकार के गठन के बाद कई नीतिगत मुद्दों पर भारत और बांग्लादेश के बीच मतभेद उभरे हैं। इनमें सीमा प्रबंधन, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग जैसे विषय शामिल हैं।

  
भारत की कूटनीतिक रणनीति  




कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम सुरक्षा और संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक ओर यह अपने अधिकारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम है, वहीं दूसरी ओर यह ढाका को यह संकेत भी देता है कि नई दिल्ली मौजूदा हालात को लेकर गंभीर है। हालांकि भारत ने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की आलोचना से बचते हुए इसे एक आंतरिक सुरक्षा-आधारित फैसला बताया है।

  
बांग्लादेश में चुनावी माहौल  




बांग्लादेश में होने वाले संसदीय चुनाव पहले से ही विवादों और अनिश्चितताओं से घिरे हैं। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अंतरिम सरकार का दावा है कि स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे माहौल में विदेशी राजनयिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा बन जाती है। यही वजह है कि कई देश अपने नागरिकों और कर्मियों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।

  
कूटनीतिक संवाद जारी



फिलहाल भारत ने अपने राजनयिक मिशनों के संचालन में कोई कटौती नहीं की है और बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हालात के अनुसार आगे के फैसले लिए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो जाते हैं और सुरक्षा स्थिति में सुधार आता है, तो भविष्य में परिवारों की वापसी पर विचार किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में भारत का यह कदम एक सावधानीपूर्ण और व्यावहारिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।







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