search

यूपी में वक्फ संपत्ति के मुतवल्लियों को अब देना होगा पूरा हिसाब, सूचना आयुक्त ने दिए निर्देश

deltin33 2026-1-21 06:57:56 views 875
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मुतवल्लियों को भी वक्फ संपत्ति का हिसाब देना होगा। राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने फर्रुखाबाद की परमिंदर कौर की एक याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि मुतवल्ली भले ही लोक प्राधिकारी की श्रेणी में न आते हों, लेकिन वक्फ संपत्तियों के उपयोग, आय, उद्देश्य का हिसाब देने से उन्हें मुक्त नहीं किया जा सकता।

पीठ ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड से कहा है कि मुतवल्ली लोक प्राधिकारी नहीं है, इसलिए वक्फ संपत्ति में क्या हो रहा है, यह जानने या नियंत्रित करने का अधिकार बोर्ड को नहीं है, तो यह वक्फ अधिनियम 1995 को निष्प्रभावी करने के समान होगा। वक्फ संपत्तियां कुछ व्यक्तियों की निजी जागीर बनकर रह जाएंगी।

सूचना मांगी गई थी कि वक्फ संपत्ति में शराब की दुकान खोलने की अनुमति बोर्ड से की गई थी या नहीं? शराब की दुकान से मुतवल्ली प्रतिमाह कितना किराया प्राप्त होना दर्शा रहे हैं? वक्फ बोर्ड ने जब यह जानकारी नहीं दी तो, परमिंदर कौर ने सूचना आयोग में अपील की।

इस पर बोर्ड ने कहा कि संपत्ति को किराए पर देने, किराया वसूलने का अधिकार मुतवल्ली में निहित है। वह लोक पदाधिकारी नहीं है, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है। सूचना आयुक्त ने इस उत्तर को अस्वीकार करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मुतवल्ली वक्फ संपत्ति का स्वामी नहीं होता, बल्कि एक ट्रस्टी/प्रबंधक होता है। इसलिए मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने योग्य है।

अस्पष्ट और भ्रामक उत्तर देकर बोर्ड ने अपने वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन किया है। इसलिए वह 15 दिन के भीतर बिंदुवार, स्पष्ट, प्रमाणित अभिलेखों सहित पूरी सूचना उपलब्ध कराएं।

आयोग ने आदेश दिया है कि मुतवल्ली के लोक पदाधिकारी न होने का यह अर्थ नहीं है कि वक्फ संपत्ति में मनमाना कार्य किया जा सकता है। ऐसा तर्क वक्फ की मूल अवधारणा को ध्वस्त करता है। यहां प्रश्न मुतवल्ली का नहीं, बल्कि बोर्ड की वैधानिक जिम्मेदारी का है, जो वक्फ संपत्तियों का कस्टोडियन एवं सुपरवाइजर है।

संबंधित मुतवल्ली के पेश किए गए लेखा-जोखा की विशेष जांच कर उसकी प्रति आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सूचना अधिकारी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी/सचिव से 30 दिन में सुधारात्मक कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को पेश करने के आदेश दिए गए हैं। इस आदेश की प्रति राज्य सरकार, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एवं प्रमुख सचिव भेजने के लिए कहा गया है।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
477853