search
 Forgot password?
 Register now
search

केरल विधानसभा में राज्यपाल के भाषण पर विवाद गहराया, सीएम विजयन ने लगाए गंभीर आरोप

deltin33 Yesterday 23:26 views 371
  

सीएम विजयन ने लगाए आरोप। (पीटीआई)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केरल विधानसभा में मंगलवार को तब अजीबोगरीब हालात पैदा हो गए जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सदन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा। विजयन ने कहा कि छोड़े गए अंशों में भाजपा-शासित केंद्र सरकार की राजकोषीय नीति की आलोचना करने वाले हिस्से और राजभवन में लंबित विधेयकों से संबंधित चीजें शामिल थीं।

उधर, केरल राजभवन ने कहा कि राज्यपाल के भाषण पर विवाद \“\“अनावश्यक और निराधार\“\“ है। अर्लेकर ने सरकार से झूठे दावे मसौदे से हटाने के लिए कहा था।

मुख्यमंत्री विजयन के अनुसार, राज्यपाल ने दस्तावेज के 12वें पैरा का शुरुआती हिस्सा और 15वें पैरा के अंतिम हिस्से को नहीं पढ़ा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 157 पैरा और 72 पृष्ठों वाले नीतिगत भाषण के 16वें पैरा में राज्यपाल द्वारा एक पंक्ति जोड़ी गई।??

विजयन ने सदन को बताया कि जिन अंशों को राज्यपाल ने नहीं पढ़ा, उनमें एक यह था- \“इन सामाजिक और संस्थागत उपलब्धियों के बावजूद केरल को केंद्र सरकार की एक के बाद एक प्रतिकूल कार्रवाइयों के कारण गंभीर राजकोषीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है जो राजकोषीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करता है।\“

विजयन ने कहा कि इसके अलावा राज्यपाल द्वारा नहीं पढ़े गए अन्य अंश थे- \“ राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक लंबे समय तक लंबित रहे हैं। इन मुद्दों पर मेरी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिन्हें संविधान पीठ के पास भेजा गया है।\“

अर्लेकर द्वारा किए गए जोड़ के संदर्भ में विजयन ने कहा कि राज्यपाल ने पैराग्राफ 16 के दूसरे हिस्से में \“मेरी सरकार मानती है\“ जोड़ दिया, जो इस प्रकार है- \“कर का बंटवारा और वित्त आयोग अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, यह कोई दान नहीं है और इस जिम्मेदारी से जुड़े संवैधानिक निकायों पर किसी भी तरह का दबाव संघीय सिद्धांतों को कमजोर करता है।\“

विजयन ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर नीतिगत संबोधन को ही आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया जाए तथा राज्यपाल द्वारा उसमें जोड़े गए या छोड़ गए हिस्से स्वीकार न किए जाएं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष एएन शमसीर ने कहा कि सदन की पूर्व परंपराओं के अनुसार मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित संबोधन में कोई हिस्सा छोड़े जाने या कोई हिस्सा जोड़ने को आधिकारिक मान्यता नहीं दी जाती और इस बार भी वही रुख अपनाया जाएगा।

विजयन के आरोपों के कुछ देर बाद ही राजभवन कहा कि राज्यपाल ने भाषण के मसौदे से \“अर्ध-सत्य\“ तथ्यों को हटाने का अनुरोध किया था। जारी बयान में कहा गया-\“\“ सरकार ने जवाब दिया था कि राज्यपाल द्वारा उचित समझे जाने वाले संशोधनों के साथ भाषण तैयार किया जा सकता है और पढ़ा जा सकता है। यह भी संकेत दिया गया था कि सुझाए गए परिवर्तनों के साथ भाषण को दोबारा भेजा जा सकता है।

हालांकि, कल आधी रात के बाद बिना किसी संशोधन के वही भाषण राज्यपाल को वापस भेज दिया गया। इसमें कहा गया कि भाषण में दावा किया गया कि पारित विधेयक काफी समय तक लंबित रहने से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को भेजा है जबकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें संवैधानिक पीठ के पास नहीं भेजा है। इसलिए राज्यपाल ने अनुरोध किया था कि इस संदर्भ को हटा दिया जाए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि भाषण का वह हिस्सा हटा दिया जाए, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार का रुख आर्थिक संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। राजभवन ने कहा कि इसके बजाय, यह सिफारिश की गई थी कि यह दर्ज किया जाए कि अग्रिम धनराशि से इनकार किए जाने के कारण केरल गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहा है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4610K

Credits

administrator

Credits
464673

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com