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राज्यपाल आरएन रवि ने अभिभाषण के बिना सदन छोड़ा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि मंगलवार को विधानसभा में साल के पहले सत्र के दौरान अपना परंपरागत अभिभाषण पढ़े बिना ही सदन से बाहर चले गए।
उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में भ्रामक दावे किए जाने का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया।
बाद में राजभवन ने बयान जारी कर कहा कि राज्यपाल का माइक बंद किया गया, उन्हें बोलने तक नहीं दिया गया। आरोप लगाया गया कि राष्ट्रगान का भी अपमान किया गया।
उधर, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल के इस कदम की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह उच्च पद की गरिमा, परंपराओं और मूल्यों के अनुरूप नहीं है और सदन का अपमान है।
राज्यपाल आरएन रवि ने अभिभाषण के बिना सदन छोड़ा
ऐसा किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्टालिन ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन करके साल की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण देने के प्रविधान को हटाने का प्रयास करेगी।
उन्होंने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि केवल सरकार द्वारा तैयार किया गया अभिभाषण ही आधिकारिक रिकार्ड में जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि अनुच्छेद 176 के अनुसार परंपरागत अभिभाषण राज्य सरकार द्वारा तैयार किया जाता है और इसे राज्यपाल को पूरी तरह पढ़ना चाहिए।
स्टालिन ने कहा- \“राज्यपाल ने नियम, परंपरा और मूल्यों का उल्लंघन कर यह वाकआउट किया, जो स्वीकार्य नहीं है। राज्यपाल को अभिभाषण पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करने या किसी हिस्से को छोड़ने का अधिकार नहीं है।\“
मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्यपाल के कदम की निंदा की
स्टालिन ने राज्यपाल के व्यवहार को तमिल लोगों की भावनाओं के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को राज्य की भलाई और जनता के विकास में रुचि रखनी चाहिए।
उन्हें जनता द्वारा चुनी गई सरकार के फैसलों में सहयोग करना चाहिए। लेकिन वे इसके विपरीत कार्य कर रहे हैं, जो अस्वीकार्य है।
राज्यपाल रवि के वाकआउट के दौरान सरकार और उसके सहयोगी दलों के विधायक खड़े होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने 10 अप्रैल 2023 को द्रमुक के संस्थापक सीएन अन्नादुरई के कथन को याद किया कि राज्य को राज्यपाल की आवश्यकता नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से राज्यपाल को सम्मान दिया जाता रहा है।
उधर, राजभवन ने सदन के भीतर हुई घटनाओं को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए एक बयान जारी किया। इसमें आरोप लगाया कि राष्ट्रगान का एक बार फिर अपमान किया गया। साथ ही, जनता को परेशान करने वाले कई अहम मुद्दों को पूरी तरह अनदेखा किया गया।
राष्ट्रगान बजाने की थी मांग
राज्यपाल रवि परंपरागत अभिभाषण की शुरुआत में राष्ट्रगान बजाने की मांग कर रहे थे, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि परंपरा के अनुसार शुरुआत में तमिल थाई वाज्थु और अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है। राजभवन ने 13 बिंदुओं वाला एक विवरण जारी किया, जिसमें बताया गया कि राज्यपाल ने संबोधन पढ़ने से क्यों इनकार किया।
इसमें आरोप लगाया गया कि राज्यपाल का माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया। राजभवन के अनुसार, अभिभाषण में कई अप्रमाणित दावे और भ्रामक बयान हैं। जैसे राज्य में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है जबकि वास्तविक निवेश उसका एक छोटा हिस्सा ही है।
महिला सुरक्षा के मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जबकि पाक्सो के तहत दुष्कर्म के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। बयान में दावा किया गया कि एक वर्ष में नशे के कारण 2,000 से अधिक, ज्यादातर युवा, आत्महत्या कर चुके हैं।
राजभवन के अनुसार, राज्य में एक वर्ष में लगभग 20,000 लोगों ने आत्महत्या की यानी प्रतिदिन करीब 65 मामले। तमिलनाडु को भारत की आत्महत्या राजधानी कहा जाने लगा है, फिर भी सरकार चिंतित नहीं दिखती। |
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