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उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने एतिहासिक अमीराकदल हेरिटेज पुल लोगों को किया सर्मपित, जानिए क्या है इसकी अहमियत

LHC0088 2026-1-20 16:26:24 views 1263
  

पुराने और छोड़े गए अमीरा कदल को एसएससीएल के तहत फिर से विकसित किया गया है।



जागरण संवाददाता, श्रीनगर। अंत: भीड़भाड़ वाले शहर लालचौक के बीचों-बीच एतिहासिक अमीरा कदल रेरिटेज पुल व बाजार मंगलवार को लोगों को समर्पित किया गया। उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने पुल का औपचारिक तौर पर उद्घाटन किया। बता देते हैं कि इस पुराने पुल को श्रीनगर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एसएससीएल) प्रोजेक्ट के तहत पुराने ढांचे के मौजूदा खंभों पर फिर से बनाया गया है।

सनद रहे कि श्रीनगर के सबसे व्यस्त कमर्शियल इलाकों में से एक में स्थित, यह पुल पिछले एक दशक में शहर का तीसरा ऐसा पुल बन गया है जिसे जीरो ब्रिज और हब्बा कदल के जीर्णोद्धार के बाद पैदल चलने वालों के लिए एक हेरिटेज जगह के रूप में फिर से तैयार किया गया है।

इस प्रोजेक्ट का मकसद अमीरा कदल के ऐतिहासिक स्वरूप को बहाल करना है, साथ ही भीड़भाड़ वाले कमर्शियल इलाके में पैदल चलने वालों की आवाजाही को आसान बनाना है। हालांकि काम पूरा करने की शुरुआती डेडलाइन मई 2024 थी, लेकिन पास के गोनी खान बाजार में दुकानों को हटाने में दिक्कतों के कारण काम में देरी हुई। अलबत्ता आज इसका निर्माण कार्य मुकम्मल होते ही इसे जनता को समर्पित किया गया।

पुराने और छोड़े गए अमीरा कदल को एसएससीएल के तहत फिर से विकसित किया गया है, जिससे श्रीनगर में एक नया बाजार जुड़ गया है।
पुराने श्रीनगर से जुड़ी यादें फिर ताजा हुई

दुकानदारों और निवासियों के लिए, पुल के फिर से खुलने से उम्मीदें सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि बेहतर बिजनेस की संभावनाओं से लेकर पुराने श्रीनगर से जुड़ी यादों के फिर से ताज़ा होने तक हैं।

पुल के खुलने पर आम लोग खुश हैंं। पुल के साथ सटे बाजार में कपड़े की दुकान करने वाले अंसार मोहम्मद नामक एक दुकानदार ने कहा, हम उत्साहित हैं क्योंकि हमने इस पुल और इसके इतिहास के बारे में अपने बड़ों से सुना है।”

रोहित साहनी, एक कपड़े के व्यापारी जिनकी दुकान पुराने पुल के टूटने से पहले स्थापित हुई थी, ने कहा कि पुल का भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह का महत्व है। रोहित ने कहा, यह हमारे लिए कोई नया पुल नहीं है। इसका इतिहास राजाओं और महाराजाओं के ज़माने का है, और इसे कुछ खास परिस्थितियों के कारण तोड़ा गया था।

लेकिन अब इस पुल को एक नए और आकर्षित आकार में बनाया गया है जिससे यहां पैदल चलने वालों की आवाजाही बढ़ने से ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी। मौजूदा पुल की ओर इशारा करते हुए रोहित ने कहा, मौजूदा पुल पर विक्रेताओं का कब्ज़ा है, इसलिए लोगों को, खासकर महिलाओं को चलने में मुश्किल होती है।
पुल पर सौ से ज़्यादा विक्रेता काम करते हैं

इस नए पुल पर किसी भी विक्रेता को अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर यह खाली रहता है, तो यह ज़्यादा सुरक्षित और पार करने में आसान होगा। बता देते हैं कि वर्तमान में, मौजूदा पुल पर सौ से ज़्यादा विक्रेता काम करते हैं, जो कपड़े, खाने-पीने की चीज़ें और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट सहित कई तरह का सामान बेचते हैं।

रोहित की दुकान के साथ ही सटे रेडीमेड़ कपड़ों की दुकान करने वाली मोहम्मद मकबूल वार नामक एक अन्य दुकानदार ने कहा, यह हेरिटेज पुल टूरिसटों के आकर्षण का केंद्र बनेगा क्योंकि इस पुल पर हमारे यहां की हस्तकलाओं को दर्शाने वाली छोटी छोटी दुकानें लगाई जानी है। यहां टूरिस्ट खिंचे चले आएंगे और जाहिर सी बात है कि हमारे ग्रहाकों की संख्या भी बढ़ेगी।

इधर बुज़ुर्ग निवासियों के लिए, अमीरा कदल का फिर से खुलना एक खोई हुई विरासत के फिर से ज़िंदा होने जैसा है। 78 वर्षीय अी मोहम्मद नाइकों नामक एक वृदिध ने कहा,बहुत अच्छा लगा कि यह पुल एक नए रूप में हमारे सामने फिर से आ गया है।

नाइकू ने अपनी जवानी के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन दिनों वह अपने दोस्तों के साथ देर तक पुराने अमीराकदल पुल पर बैठ गप्पे हांका करता था। नाइकू ने कहा, उन दिनों यहां इतनी भीड़भाड़ और ट्रैफिक का रश नही रहता था। हम देर रात तक पुल के एक तरफ बैठ अपना खाली वक्त बिताते थे क्योंकि यह पुल हमारी पसंदीदा जगहों में से एक हुआ करता था।
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