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पुराना FASTag होने पर भी मिल सकता है 3000 रुपये वाला नया फास्टैग, बस करना होगा तय नियमों का पालन

LHC0088 2026-1-20 00:56:40 views 1259
  

सांकेतिक तस्वीर।



अंकुर अग्रवाल, जागरण देहरादून। हाईवे पर सफर करने वाले निजी वाहन चालकों के लिए 3000 रुपये वाली फास्टैग स्कीम को लेकर लोगों में भ्रम को राज्य परिवहन विभाग ने दूर कर दिया है।

परिवहन विभाग के अनुसार, जिन वाहनों पर पहले से फास्टैग लगा हुआ है, वे भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए तय नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

परिवहन विभाग का कहना है कि प्रक्रिया पूरी किए बिना नया फास्टैग लेने वाले वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

गत वर्ष 15 अगस्त से लागू हुई इस योजना के तहत निजी वाहन स्वामी एकमुश्त 3000 रुपये का भुगतान कर नया फास्टैग प्राप्त कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना, यात्रा समय घटाना और डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत करना है।

इससे वाहन चालकों को बार-बार रिचार्ज कराने की झंझट से भी राहत मिलेगी। 3000 रुपये वाली फास्टैग योजना से हाईवे पर यात्रा अधिक सहज और समयबद्ध होती है।

इसमें आपको 200 बार टोल प्लाजा की सुविधा मिलती है। यानी, आप एक वर्ष में 200 टोल पर योजना का लाभ ले सकते हैं, चाहे इन टोल का शुल्क 10000 रुपये ही क्यों न हो।
पुराने फास्टैग वालों को क्या करना होगा

यदि वाहन पर पहले से फास्टैग लगा है, तो उसे पहले बंद कराना होगा। यह प्रक्रिया संबंधित बैंक या फास्टैग जारी करने वाली एजेंसी की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या कस्टमर केयर के माध्यम से पूरी की जा सकती है।

पुराने फास्टैग में यदि बैलेंस बचा है, तो वाहन स्वामी उसे वापस ले सकता है या खाते में समायोजित करा सकता है। पुराने फास्टैग के पूरी तरह डिएक्टिवेट होने के बाद ही नई स्कीम के तहत आवेदन मान्य होगा।
ऐसे बनवाएं नया फास्टैग

नया फास्टैग बनवाने के लिए वाहन स्वामी को वाहन का पंजीकरण प्रमाण पत्र (आरसी) और पहचान पत्र के साथ अधिकृत बैंक, एनएचएआइ से जुड़े केंद्र या आनलाइन प्लेटफार्म पर आवेदन करना होगा।

3000 रुपये का भुगतान करने के बाद नया फास्टैग जारी किया जाएगा, जिसे वाहन के फ्रंट शीशे पर निर्धारित स्थान पर लगाना अनिवार्य है।
दिल्ली के 25 ट्रिप लगा सकते हैं

3000 रुपये का रिचार्ज करने पर दी जा रही 200 टोल सुविधा से आप देहरादून-दिल्ली के बीच 25 बार आना-जाना कर सकते हैं।

सामान्य फास्टैग पर इतनी यात्रा करने पर देहरादून-रुड़की-मुजफ्फरनगर-मेरठ-दिल्ली मार्ग पर चार टोल प्लाजा पर 405 रुपये शुल्क अदा करना पड़ता है, जो 25 बार एक तरफ की यात्रा का 10,125 रुपये बैठता है।

यानी, अगर आप आना-जाना करते हैं तो आपको 20,250 रुपये का टोल लगता है, लेकिन केंद्र की 3000 रुपये की योजना के अंतर्गत आप यह यात्रा केवल 3000 रुपये में कर सकते हैं।

हालांकि, शर्त यह है कि 3000 रुपये के रिचार्ज पर मिलने वाली सुविधा की समय-सीमा एक वर्ष रहेगी और यह केवल निजी कार के लिए मान्य रहेगी।
इन बातों का भी रखें ध्यान

यह वार्षिक पास सुविधा केवल उसी वाहन के लिए वैध है, जिसकी विंडशील्ड पर फास्टैग लगा होगा। साथ ही यह किसी दूसरे वाहन पर हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। चेसिस नंबर पर जारी फास्टैग पर यह सुविधा नहीं मिलती है।

वाहन चालकों को वाहन पंजीकरण संख्या (वीआरएन) सक्रिय करना होता है। यानी कि जो फास्टैग वाहन के पंजीयन नंबर के माध्यम से बने होते हैं, यह सुविधा उन्हीं वाहनों को मिलती है। व्यावसायिक वाहनों को इसकी सुविधा नहीं मिलती।
फास्टैग से जुड़ी जरूरी जानकारी

  • एक वाहन पर एक ही फास्टैग सक्रिय रह सकता है
  • नया फास्टैग लेने से पहले पुराने को डिएक्टिवेट कराना अनिवार्य
  • पुराने फास्टैग का शेष बैलेंस रिफंड या समायोजित कराया जा सकता है
  • बिना डिएक्टिवेशन के नया टैग लेने पर ब्लैकलिस्ट/जुर्माना संभव
  • 3000 रुपये की योजना निजी कार, जीप और वैन के लिए के लिए है


एक वाहन पर दो फास्टैग सक्रिय रखना नियमों के खिलाफ है। नया फास्टैग लेने से पहले पुराने फास्टैग को बंद कराना जरूरी है। ऐसा न करने पर फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो सकता है और टोल प्लाजा पर वाहन को रोका भी जा सकता है। वाहन स्वामियों से अपील है कि केवल अधिकृत माध्यम से ही फास्टैग बनवाने और सही जानकारी दर्ज करें।
-संदीप सैनी, आरटीओ (प्रशासन)


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