मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों WEF-2026 में भाग लेने के लिए दावोस में हैं। (फोटो-एक्स से)
राज्य ब्यूरो, रांची। बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन मामले में हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल की गई है। ईडी कोर्ट में डिस्चार्ज याचिका पर 30 जनवरी को सुनवाई होगी। सोमवार को मामले में सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।
हेमंत सोरेन ने मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। इसी मामले में आरोपित शेखर प्रसाद महतो की डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
मामले में हेमंत सोरेन समेत 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर रखी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया है।
तब हाई कोर्ट ने कहा था, प्रथम दृष्ट्या हेमंत नहीं हैं दोषी
गौरतलब है कि जमीन घोटाले के एक केस में जांच कर रही ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। उन पर रांची के बड़गाईं स्थित 8.86 एकड़ जमीन की घेराबंदी करवाकर कब्जे की कोशिश का आरोप लगा था। हालांकि, झारखंड उच्च न्यायालय ने ईडी की दलील को नहीं माना और 28 जून 2024 को उन्हें जमानत का लाभ दे दिया था।
उसके बाद से ही हेमंत सोरेन जेल से बाहर हैं। ईडी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी। हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा था के प्रथम दृष्ट्या सबूतों को देखने के बाद यह कतई साबित नहीं हुआ है कि हेमंत सोरेन कथित अपराध के लिए दोषी हैं। बड़गाईं अंचल के तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानू प्रताप प्रसाद के ठिकाने से बरामद कई रजिस्टरों व रेवेन्यू रिकार्ड में हेमंत सोरेन या उनके परिवार के सदस्यों का नाम नहीं था।
पीएमएलए के तहत ईसीआइआर कर सीएम तक पहुंची थी ईडी
रांची के सदर थाने में बड़गाईं अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी में ईडी ने इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) किया था। उक्त केस भानु प्रताप प्रसाद के निजी आवास से भारी संख्या में बरामद सरकारी दस्तावेज, पंजी टू आदि की बरामदगी मामले में दर्ज किया गया था। इस केस की जांच के क्रम में ईडी ने दावा किया था कि बरियातू में लालू खटाल रोड स्थित 8.86 एकड़ भुईहारी जमीन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कब्जा करते हुए उसकी घेराबंदी कराई थी।
उक्त जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती है। ईडी ने दलील दी थी कि हेमंत सोरेन अपने व पारिवारिक सदस्यों के नाम पर उक्त जमीन को हस्तांतरित करवाने वाले थे, इससे पहले ही इसका भंडाफोड़ हो गया। ईडी ने उक्त जमीन के केयरटेकर संतोष मुंडा आदि का बयान भी कोर्ट में सौंपा था, जिसमें केयरटेकर ने भी उक्त जमीन को हेमंत सोरेन का बताया था। हाई कोर्ट ने ईडी के सबूतों को हेमंत सोरेन के विरुद्ध पर्याप्त नहीं मानते हुए जमानत का लाभ दिया था। अब हेमंत सोरेनकीओरसेइस केस से खुद को बरी करने के लिए कोर्ट से आग्रह कियागयाहै।
मनी लांड्रिंग मामले में अभिषेक झा की डिस्चार्ज खारिज
ईडी की विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मनरेगा घोटाले की राशि का मनी लांड्रिंग करने में सहयोग करने के आरोपित अभिषेक झा की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने 16 जनवरी को उनकी डिस्चार्ज याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाया है।
याचिकाकर्ता ने मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए डिस्चार्ज करने की गुहार लगाते हुए 16 जून को याचिका दाखिल की थी। पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने लिखित बहस दाखिल की थी।
मामले में सेवानिवृत्त इंजीनियर जय किशोर चौधरी भी आरोपित है। दोनों पर आरोप तय किया जाना है। जय किशोर चौधरी की याचिका पूर्व में खारिज हो चुकी है। इसी मामले में आरोपित पूजा सिंघल सहित चार के खिलाफ ईडी अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत कर रहा है।
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