अब प्रॉपर्टी बेचने और खरीदने के लिए प्रापर्टी डीलर्स के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी (फाइल फोटो)
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। अब अगर आप अपनी रेजिडेंश्यल और कामर्शियल प्रापर्टी बेचना चाहते है और चाहते है कि इसके लिए आपको किसी डीलर (बिचौलियों)के पास न जाना पड़े और सीधे खरीददार ही प्रापर्टी को खरीदे तो अब आपको यह सुविधा मिलने जा रही है ।इसके साथ ही खरीददार को भी अब इस झंझट से छुटकारा मिल जाएगा कि प्रापर्टी के दस्तावेज पूरे है या नहीं, या प्रापर्टी पर कोई विवाद तो नहीं है क्योंकि यह सारा काम अब प्रशासन ही खुद करके देगा।
प्रशासन ने शहरवासियों की पहले से खरीदी गई निजी प्रापर्टी को बेचने के लिए एक नया प्रपोजल तैयार किया है जिसके तहत प्रशासन ही लोगों की प्रापर्टी को ई नीलामी द्वारा बेचेगा ।प्रशासन एक प्रापर्टी डीलर की तरह यह काम करेगा और जिस तरह से डीलर प्रापर्टी खरीदने और बेचने वालों से कमिशन चार्ज करता है उसी तरह से संपदा विभाग भी खरीददार और विक्रेता के बीच हस्ताक्षेप करके मदद करेगा और खरीददार और विक्रेता दोनो से आधा आधा प्रतिशत कमिशन चार्ज करेगा।
प्रशासन के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में कई बार संपत्तियों की वास्तविक कीमत से कम मूल्य दर्शाकर रजिस्ट्री कराई जाती है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि भविष्य में कानूनी विवाद भी उत्पन्न होते हैं। इस तरह का प्रयास पहली बार किय जा रहा है।
निजी संपत्तियों की खरीद और बिक्री में पारदर्शिता लाने, उचित मूल्य सुनिश्चित करने तथा खरीदारों को विवादित या धोखाधड़ी वाले सौदों से बचाने के उद्देश्य से यूटी प्रशासन ने इस नई व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत जिस किसी को भी प्रापर्टी बेचनी है वह सरकारी पोर्टल पर प्रापर्टी की जानकारी के साथ पंजीकृत करेगा।
यह पहल विशेष रूप से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए भी लाभकारी सिद्ध होने की उम्मीद है। एनआरआई अक्सर अपनी संपत्तियों को बेचने या स्थानांतरित करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं। स्थानीय निगरानी के अभाव और धोखाधड़ी की आशंका के चलते कई एनआरआई अपने प्लाट, मकान या अन्य संपत्तियों का सौदा करने से हिचकते हैं। प्रशासन का मानना है कि एक सुव्यवस्थित और विनियमित प्रक्रिया एनआरआई को सुरक्षित और भरोसेमंद मंच प्रदान करेगी, जिससे वह बिना किसी भय के अपनी संपत्तियों का निपटान कर सकेंगे।
प्रशासन के अनुसार इस नए सिस्टम के माध्यम से खरीददारी अपनी प्रापर्टी की डिटेल पोर्टल पर डाल देगा। संपदा विभाग प्रापर्टी के दस्तावेज को चेक करेगा क्योंकि संपदा विभाग के पास पहले से सारी प्रापर्टी का रिकार्ड पड़ा हुआ है। इसका फायदा यह भी मिलेगा कि अगर प्रापर्टी में कोई विवाद है या कोई दस्तावेज नहीं है तो संपदा विभाग उसकी कमी को अपने स्तर पर पूरा कर देगा ।कई बार कोई विवाद होने की जानकारी खरीददार को सौदे के बाद ही मिलती है।
प्रशासन खरीददार द्वारा मांगी गई कीमत पर ई नीलामी करवाएगा। ऐसे में जाे भी ऊंची बोली देगा वह प्रापर्टी खरीद लेगा बाद में रजिस्ट्ररी और मालिकाना हक बदलने का काम भी संपदा विभाग ही करवाएगा ।प्रशासन के बीच में हस्ताक्षेप करने से दोनो पार्टी को संतुष्टी रहेगी कि डील बिल्कुल साफ सुथरी हुई है ।इसके साथ ही कई बार प्रापर्टी डीलर्स द्वारा अपने आप ही रेट बढ़ा दिए जाते हैं उस पर भी अंकुश लगेगा।
लेकिन इस नए सिस्टम के लागू होने से एक दिक्कत यह भी रहेगी कि खरीददार जितनी कीमत पर खरीदेगा उसे पूरी राशि व्हाइट मनी के तौर पर ही देनी होगी और पूरी कीमत पर ही स्टांट डयूटी देनी होगी इससे प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा क्योंकि इस समय बाहर से प्रापर्टी खरीदने पर व्हाइंट मनी कम या कलेक्टर रेट पर ही रजिस्ट्ररी करवाई जाती है ।प्रशासन 7 प्रतिशत स्टांप डयूटी चार्ज करता है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर विभिन्न स्टेक होल्डर्स से सुझाव लिए जाएंगे और आवश्यक कानूनी व प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विचार के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। डीसी निशांत यादव का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य संपत्ति सौदों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अंडरप्राइसिंग (कम मूल्य दिखाकर सौदे) तथा अवैध लेन-देन पर प्रभावी अंकुश लगाना है। इससे न केवल खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में व्याप्त अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी । |
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