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सोनीपत के खरखौदा में हर महीने सफाई पर 25 लाख रुपये खर्च, शहर में फिर गंदगी के ढेर लगे

Chikheang 1 hour(s) ago views 520
  



संवाद सहयोगी, खरखौदा। शहर में सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब 25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, बावजूद इसके शहर की तस्वीर बदहाल बनी हुई है। गली-मोहल्लों में कूड़े के ढेर, खाली प्लाटों में फैलती गंदगी और नालों की सफाई न होने से शहरवासियों में भारी नाराजगी है। सवाल यह है कि जब इतना बड़ा बजट खर्च हो रहा है, तो शहर साफ क्यों नहीं दिख रहा?

नगरपालिका की ओर से खरखौदा शहर में करीब 15 हजार प्रॉपर्टी आइडी दर्ज हैं। इन सभी से नपा द्वारा गारबेज चार्ज वसूला जा रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जब उनसे सफाई के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, तो बदले में उन्हें बेहतर व्यवस्था मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है, कई इलाकों में कई-कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता।

एक समय ऐसा था जब पूरे शहर की सफाई व्यवस्था केवल 21 कर्मचारियों के सहारे चल रही थी। वर्तमान में सफाई के लिए ठेके पर अलग से 55 कर्मचारी लगाए गए हैं। इसके बावजूद न तो डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था सुचारु है और न ही गलियों, नालियों की नियमित सफाई हो पा रही है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि समस्या कर्मचारियों की संख्या की नहीं, बल्कि निगरानी और व्यवस्था की है।
अलग-अलग टेंडर, फिर भी खानापूर्ति

सफाई के नाम पर नगरपालिका ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने, गलियों की सफाई और नालों की सफाई के लिए अलग-अलग टेंडर छोड़ रखे हैं। इससे पहले तो रात के समय मुख्य सडकों का एक अलग से भी टेंडर छोड़ा गया था, बावजूद इसके, शहर में सफाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। कई जगह कूड़ा गाड़ियों के न पहुंचने से लोग मजबूरी में गली या खाली प्लाटों में कूड़ा डाल रहे हैं, जिससे गंदगी और बदबू बढ़ रही है। वहीं कई जगहों गलियों और नालियों की सफाई महीनों में हो रही है।
दो जोन में बंटा शहर, पर कोई सुधार नहीं

सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शहर को दो जोन में बांटा गया है, ताकि निगरानी आसान हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जोन व्यवस्था भी बेअसर साबित हो रही है। न तो समय पर सफाई हो रही है और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नजर आ रही है।

शहरवासियों का कहना है कि सफाई पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद हालात नहीं सुधरना गंभीर चिंता का विषय है। शहर के कई पार्षद भी मांग कर चुके हैं कि सफाई व्यवस्था की निष्पक्ष जांच हो, ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए और नियमित मानिटरिंग सुनिश्चित की जाए, क्योंकि खरखौदा में सफाई को लेकर किए जा रहे तमाम जतन फिलहाल बेकार साबित हो रहे हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गंदगी के साथ-साथ जनता का आक्रोश भी बढ़ना तय है।

  
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