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Bihar Seismic Zones: उच्चतम भूकंपीय जोन में दरभंगा व मधुबनी, कोसी-सीमांचल के जिले में अधिक खतरा

Chikheang 5 hour(s) ago views 702
  

बिहार में भूकंप का खतरा। फाइल फोटो



प्रशांत कुमार, मुजफ्फरपुर। भूकंपीय जोनेशन में संशोधन किया गया है। इसमें अब नया जोखिम जोन सिक्स जोड़ा गया है। इसमें पहली बार संपूर्ण हिमालयी चाप (एक विशाल, घुमावदार पर्वत शृंखला है जो भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से बनी है) के साथ ही बिहार राज्य के दो जिलों दरभंगा व मधुबनी को उच्चतम भूकंपीय जोन-6 में शामिल किया गया है। इसी तरह उच्च जोखिम वाले जोन में भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर सहित कुल 12 जिले शामिल किए गए हैं।

नई भूकंपीय जोन मैप में पूर्वी बिहार जैसे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के जिले अधिक खतरे वाले क्षेत्र में आ गए हैं। पहले ये ज्यादातर जोन-4 में थे। अब इन्हें जोन-5 या जोन-6 में रखा गया है। इससे अब भवन निर्माण में भूकंपरोधी उपायों को कठोरता से अपनाना अनिवार्य होगा और विभिन्न हितधारकों के क्षमतावर्धन, पूर्व तैयारी एवं जागरूकता के स्तर को बढ़ाने की जरूरत होगी।
भूकंप सुरक्षा पखवारा मनाने का निर्देश

भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से संशोधित भूकंपीय जोनेशन मानचित्र जारी किया गया है। भूकंप की विभीषिका को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से 29 जनवरी तक भूकंप सुरक्षा पखवारा मनाने का निर्देश दिया गया है।

इसके तहत पूरे राज्य में भूकंप सुरक्षा सप्ताह के अधीन विभिन्न सरकारी विभागों, संस्थानों की ओर से भूकंप से बचाव की तैयारी व जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम किए जाने हैं।  

इसके लिए राज्य स्तर पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला स्तर पर संबंधित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की देखरेख में कार्यक्रम होंगे। इस संबंध में वहां से जारी पत्र में राज्य के सभी सरकारी अभियंत्रण महाविद्यालयों व पॉलीटेक्निक संस्थाओं में बिहार की भूकंप संवेदनशीलता व पूर्व तैयारी से जुड़े विभिन्न विषयों पर सेमिनार, व्याख्यान, क्विज, माकड्रिल, बैनर स्टैंडी लगाने व अन्य कार्यक्रम करने को कहा गया है।
उत्तर बिहार का क्षेत्र अति संवेदनशील

उत्तर बिहार का क्षेत्र भूकंप के लिए अति संवेदनशील जोन में आता है। MIT के सिविल विभाग के प्रो. विजय कुमार ने बताया कि यह संशोधित कोड भारतीय भूकंपीय डिज़ाइन को वैश्विक मानकों के समकक्ष बनाता है। भूकंपीय जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।

कई इंजीनियर, ठेकेदार, वास्तुविद व आम नागरिक संशोधित कोड के प्रविधानों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। इसके बिना अवैज्ञानिक निर्माण की प्रवृत्ति बढ़ रही है। बिना इंजीनियरिंग डिजाइन के निर्माण कार्य अभी जारी है, जो भूकंप के समय भारी नुकसान का कारण बन सकते हैं।

पुरानी इमारतों पर अधिक जोखिम है। बड़ी संख्या में मौजूदा इमारतें पुराने मानकों पर बनी हैं, जिनके लिए भूकंपीय सुदृढ़ीकरण की जानकारी आवश्यक है। सही जानकारी व प्रशिक्षण से भूकंप के दौरान जान-माल की हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
संशोधित कोड से होने वाले प्रमुख लाभ

  • अधिक सुरक्षित संरचनाएं : नए भूकंपीय जोन मानचित्र, बढ़े हुए जोनल फैक्टर व उन्नत डिज़ाइन स्पेक्ट्रा के कारण भवनों और संरचनाओं की भूकंप सहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • यथार्थवादी जोखिम आकलन : प्रायिकात्मक भूकंपीय खतरा माडल पर आधारित जोन निर्धारण से भूकंप के वास्तविक खतरे का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।
  • ऊंची व जटिल इमारतों के लिए बेहतर डिजाइन : मृदा–संरचना अंतःक्रिया का समावेश। इसके तहत मिट्टी के व्यवहार को ध्यान में रखकर डिजाइन करने से नींव की विफलता व संरचनात्मक क्षति की संभावना कम होगी।
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