search

देहरादून में बच्चों की जान के लिए खतरा बने 76 स्कूल भवन होंगे ध्वस्त, सीएम धामी के सख्त आदेश के बाद जागा सिस्टम

Chikheang 2026-1-19 09:26:28 views 652
  

बच्चों की जान पर खतरा बने 76 स्कूल भवन होंगे ध्वस्त



जागरण संवाददाता, देहरादून। जिले में वर्षों से सैकड़ों बच्चे ऐसे स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं, जिनकी दीवारें कब गिर जाएं, कोई भरोसा नहीं है। छतों से सरिया झांक रही हैं, बरसात में कमरों में पानी टपकता है और फिर भी पढ़ाई जारी रही। अब इस लापरवाही पर जिला प्रशासन ने निर्णायक प्रहार किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने जर्जर विद्यालय भवनों को लेकर जीरो टॉलरेंस अपनाया। नतीजा यह रहा कि महज 10 दिनों में 100 स्कूलों की जर्जर भवन रिपोर्ट सामने आ गई, जो वर्षों से फाइलों में दबाकर रखी गई थी।

जांच में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जिले के 79 विद्यालयों के भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य पाए गए। इनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। ये वह भवन हैं, जहां बच्चों का बैठना तक खतरे से खाली नहीं था। इसके अतिरिक्त 17 विद्यालय आंशिक रूप से जर्जर मिले, जबकि आठ स्कूल भवन फिलहाल सुरक्षित पाए गए।

जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि जिन 63 स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही कर दी गई है, वहां तुरंत ध्वस्तीकरण होगा। शेष 16 विद्यालयों में पहले बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, उसके बाद भवन गिराए जाएंगे।

ध्वस्तीकरण और सुरक्षा कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। लोक निर्माण विभाग को सात दिन के भीतर आंगणन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी हाल में जर्जर भवनों में पढ़ाई नहीं होगी।

यह भी पढ़ें- मसूरी को मिली विकास की रफ्तार, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने ₹6.17 करोड़ की विकास योजनाओं का किया लोकार्पण

यह कार्रवाई सिर्फ भवन गिराने की नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग की उस व्यवस्था पर सवाल भी है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को सालों तक नजरअंदाज किया।

सवालों के घेरे में शिक्षा तंत्र

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जिलाधिकारी की सख्ती न होती, तो क्या ये जर्जर स्कूल कभी सामने आते? जिन भवनों को अब निष्प्रोज्य घोषित किया गया है, वे कोई नई समस्या नहीं थे। कई स्कूल पिछले पांच से 10 साल से जर्जर हालत में थे, फिर भी न तो समय पर निरीक्षण हुआ, न ही रिपोर्टिंग।

शिक्षा विभाग, निर्माण एजेंसियों व स्थानीय प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय न होने का खामियाजा सीधे बच्चों को भुगतना पड़ा। हर साल मामूली मरम्मत दिखाकर फाइल बंद कर दी गई, जबकि असल जरूरत भवन खाली कराने और ध्वस्तीकरण की थी। अब जब कार्रवाई शुरू हुई है, तो यह साफ हो गया है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो 10 दिन में भी तस्वीर बदली जा सकती है।

रिपोर्ट व कार्रवाई का खाका

  • 79 विद्यालय भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य
  • 17 विद्यालय आंशिक रूप से जर्जर
  • 63 स्कूलों में वैकल्पिक पढ़ाई शुरू
  • 16 स्कूलों में जल्द वैकल्पिक व्यवस्था
  • 01 करोड़ रुपये ध्वस्तीकरण के लिए स्वीकृत
  • 07 दिन में आंगणन तैयार करने के निर्देश



बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्कूल में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य संचालित नहीं किया जाएगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह ढंग से कार्रवाई सुनिश्वित करेगा।


                                                                                           सविन बंसल, जिलाधिकारी
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
168833