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जागरण संवाददाता, उन्नाव। अगस्त 2025 में टैरिफ लगाए जाने के बाद जनपद के चमड़ा उद्यमियों द्वारा जहां अमेरिका की तरफ चर्म निर्यात को रोकते हुए अन्य देशों की तरफ मोड़ा जा चुका है। वहीं यूके के एफटीए का इंतजार चर्म उत्पादक कर रहे हैं। इसके बीच अमेरिका व ईरान के बीच तनातनी और कभी भी युद्ध होने के आसार होने जैसे संकट के कारण मांस निर्यात पर बड़ा असर पड़ रहा है। यहां से मांस कंटेनरों से मुंबई जाता है और वहां शिप में लोड होकर ईरान हाेते हुए इंडोनिशया, मलेशिया, इजिप्ट, तुर्की जैसे 18 देशों को जाता है। वह भी नहीं जा पा रहा है।
यहां से मांस कंटेनरों में जा रहा है लेकिन मुंबई में कंटेनर डंप हो रहे हैं। शिप पर लोड न होने के कारण वहीं खड़े रहने के कारण हमलोगों को इन कंटेनरों का किराया भी देना पड़ रहा है। इस कारण हमलोगों ने सामान्य दिनों की अपेक्षा फिलहाल मांस उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत घटा दी है। इससे लगभग 660 करोड़ का व्यापार प्रभावित हो रहा है।
जनपद में मांस निर्यातक इकाइयों की संख्या सात है। जहां प्रतिदिन 20 से 25 कंटेनर मांस भरकर मुंबई के लिए रवाना किया जाता है। मांस मुंबई पहुंचकर वहां से सबंधित देशों को भेजे जाने के लिए कंटेनर सहित शिपों पर लोड किया जाता है। ईरान व अमेरिका के बीच बने युद्ध जैसे हालातों के कारण यह कंटेनर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इन कंटेनरो के होल्ड हो जाने से इनका किराया भी मांस निर्यातकों को ही देना पड़ता है। जिसके कारण मांस निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जनपद में सात स्लाटर हाउस से मांस उत्पादन कर प्रतिदिन 20 से 25 कंटेनरों में भरकर मुंबई की ओर रवाना किया जाता है। एक कंटेनर में 100-120 टन मांस आता है। इस प्रकार जनपद से प्रतिदिन जहां 3600 टन मांस का निर्यात सामान्य दिनों में होता है। वहीं यह अब लगभग 50 प्रतिशत घट गया है। जिसका कारण है कि ईरान के साथ यहां से होकर आगे जिन देशों को मांस भेजा जाता है। वहां नहीं जा पा रहा है।
मुंबई में होल्ड हैं 500 कटेंनर
मांस निर्यातकों ने बताया कि मौजूदा समय हमारे 500 कंटेनर मुंबई में होल्ड हैं। जिसके कारण बड़ा किराया तो देना ही पड़ रहा है। वहीं जो माल रुका हुआ है। उसको देखते हुए उत्पादन में भी कटौती करनी पड़ी है।
हजारों टन कोल्ड स्टोरेज में डंप
मांस निर्यातकों ने बताया कि समस्या को देखते हुए हमारा उत्पादन भले ही घटा है लेकिन काम फिर भी रुका नही है। इसलिए जो मांस तैयार हो रहा है। वह हम अपने अत्याधुनिक व बड़ी क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज में फिलहाल डंप कर रहे हैं। जहां मांस अगले छह माह तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
यूके से एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) होने का इंतजार: मुख्तारूल अमीन
अगस्त 2025 में टैरिफ लगाए जाने के बाद जनपद के चमड़ा उद्यमियों द्वारा जहां अमेरिका की तरफ चर्म निर्यात को पूरी तरह रोकते हुए अन्य देशों की तरफ मोड़ा जा चुका है। वहीं सुपर हाउस जैसी बड़ी लेदर इंडस्ट्रीज भी यूके से एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) होने के लिए प्रतीक्षारत है। अध्यक्ष सुपरहाउस ग्रुप मुख्तारुल अमीन ने बताया कि हम लोग यूके से एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) होने का इंतजार कर रहे हैं। जिससे चर्म निर्यात को और व्यापक बाजार दिया जा सके। बताया कि भारत-यूके एफटीए को संदर्भित करता है, जिसे मई 2025 में अंतिम रूप दिया गया था, जो ब्रेक्सिट के बाद यूके का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है और भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क हटाता है, जिससे भारतीय उत्पादों जैसे चमड़ा, कपड़े और आटो पार्ट्स को ब्रिटेन में सस्ती पहुंच मिलती है और ब्रिटिश व्हिस्की और कारों पर भारत के शुल्क घटते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में वृद्धि की उम्मीद है। इससे हमलोग अमेरिका टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई कर लेंगे। वहीं ईरान में हमारे यहां से कोई लेदर एक्सपोर्ट नहीं है।
यूएस बड़ी मार्केट, सबकुछ ठीक होने की उम्मीद
अध्यक्ष सुपरहाउस ग्रुप मुख्तारुल अमीन ने बताया कि ईरान से अमेरिका की तनातनी हो अथवा अमेरिका टैरिफ का सवाल। हम उम्मीद करते हैं जल्द ही अमेरिका से सबकुछ सामान्य हो जाए तो हम अपने व्यापार को और विस्तार दे सकते हैं। अमीन ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही यूएस से सबकुछ सामान्य हो जाए तो और बड़ा बाजार उपलब्ध होगा।
घटा है मांस उत्पादन
सीनियर मैनेजर इंडार्गो फूड्स लिमिटेड नीरज त्रिवेदी ने बताया कि ईरान व अमेरिका की तनातनी के कारण ईरान व इसी देश से होकर आगे देशों को जाने वाला मांस मुंबई में ही रुक रहा है। जिसके कारण जनपद में मांस उत्पादन 50 प्रतिशत तक घटाना पड़ा है। |
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