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दिल्ली विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी बनी ‘नियमित प्रक्रिया’, चार साल में 156 प्रतिशत की बढ़त से अभिभावक परेशान

Chikheang 2026-1-18 19:57:46 views 1246
  Delhi University



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी अब एक नियमित प्रक्रिया बनती जा रही है, जिसने छात्रों के साथ-साथ कालेज प्रशासन को भी असमंजस में डाल दिया है। बीते छह महीनों में दूसरी बार विश्वविद्यालय स्तर पर शुल्क बढ़ाए जाने से यह चिंता और गहरी हो गई है कि क्या सार्वजनिक विश्वविद्यालय में शिक्षा धीरे-धीरे आम छात्रों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। वर्ष 2026-27 सत्र से संस्थागत सुविधाओं से जुड़ी फीस में ताजा वृद्धि लागू की गई है, जिसके साथ ही पिछले चार वर्षों में डीयू की केंद्रीय फीस में कुल 156 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
घोषित नीति से भी अधिक बढ़ोतरी

ताजा संशोधन के बाद संयुक्त शुल्क में दिल्ली विश्वविद्यालय का हिस्सा बढ़कर 4,100 रुपये हो गया है, जो जुलाई 2025 में तय 3,500 रुपये से करीब 17 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी विश्वविद्यालय की घोषित नीति से भी अधिक बताई जा रही है, जिसमें महंगाई की भरपाई के लिए सालाना लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि की बात कही गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि 2022 के बाद से कोई भी शैक्षणिक वर्ष ऐसा नहीं रहा, जब छात्रों को फीस बढ़ोतरी का सामना न करना पड़ा हो।
अभिभवकों की जेब पर अतिरिक्त दबाव

काॅलेजों के प्रशासन का कहना है कि समस्या केवल बढ़ी हुई रकम की नहीं, बल्कि उसकी निरंतरता और रफ्तार की है। दिल्ली विश्वविद्यालय एक सार्वजनिक संस्थान है, जहां देश के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में बार-बार फीस बढ़ने से उच्च शिक्षा का बोझ लगातार बढ़ रहा है। काॅलेजों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय स्तर पर ली जाने वाली फीस के अलावा कालेज स्तर पर अलग से शुल्क तय किए जाते हैं, जिससे प्रति सेमेस्टर छात्रों के अभिभवकों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
कई मदों में बढ़ा रहे फीस

विश्वविद्यालय विकास निधि 2022 में 900 रुपये थी, जो 2026 में बढ़कर 1,750 रुपये हो गई है। इसी तरह सुविधाओं और सेवाओं से जुड़ा शुल्क 500 रुपये से बढ़कर 1,750 रुपये तक पहुंच चुका है। ईडब्ल्यूएस वेलफेयर फंड भी चार वर्षों में तीन गुना होकर 300 रुपये कर दिया गया है। इन सभी बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रमों पर पड़ रहा है, जहां हर साल शुल्क जुड़ने से कुल फीस काफी बढ़ जाती है।

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