बिहार राजनीति : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नाथनगर के लोजपा आर के विधायक मिथुन यादव
जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार राजनीति : जनता दल (यूनाइटेड) में भीतरघात करने वालों के खिलाफ अब मोर्चा खुल चुका है। पहले पार्टी के नेताओं ने ऐसे लोगों के खिलाफ प्रदेश नेतृत्व को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी और अब नाथनगर के लोजपा रामविलास पार्टी के विधायक मिथुन यादव मैदान में उतर आए हैं। इसके साथ ही नाथनगर की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
जदयू कार्यकर्ताओं पर भीतरघात का आरोप
हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नाथनगर क्षेत्र में कुछ ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने पार्टी में रहते हुए जदयू और एनडीए गठबंधन के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया। आरोप है कि इन लोगों ने या तो निर्दलीय चुनाव लड़ा या फिर विरोधी दलों और दूसरे प्रत्याशियों के पक्ष में खुलकर काम किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सामान्य अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा भीतरघात और राजनीतिक विश्वासघात है। इससे न सिर्फ चुनावी नुकसान हुआ, बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
कई जदयू नेताओं ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया
जिन लोगों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उनमें पूर्व राजनीतिक सलाहकार अजय कुमार राय, जयप्रकाश मंडल, धनंजय मंडल, सीपू मंडल, अरविंद कुमार मंडल, शिशुपाल भारती, गुरुदेव मंडल और बृजेश सिंह के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ ने जन सुराज प्रत्याशी तो कुछ ने राजद प्रत्याशी के पक्ष में काम किया, जबकि कुछ खुद निर्दलीय मैदान में उतर गए थे।
नाथनगर विधायक ने कहा- ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो
नाथनगर के विधायक मिथुन यादव का कहना है कि अगर अब भी ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी में गलत संदेश जाएगा और अनुशासन पूरी तरह कमजोर हो जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पार्टी में रहकर विरोधियों के लिए काम करने वालों के लिए जदयू में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी सख्ती कीजिए
विधायक मिथुन यादव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जदयू में पार्टी व गठबंधन के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य नहीं करने वालों पर सख्ती करें। जदयू के कई नेताओं ने भी प्रदेश नेतृत्व से मांग की है कि सभी आरोपितों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए, ताकि यह संदेश जाए कि जदयू में भीतरघात और बगावत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। |
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