ED Al Falah University seizure
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। ईडी ने बताया है कि विश्वविद्यालय ने लाल किले के पास 10 नवंबर को किए गए आतंकी धमाकों में संलिप्त सफेदपोश आतंकी डॉक्टरों की नियुक्ति बिना किसी पुलिस सत्यापन के की थी।
260 पन्नों का आरोपपत्र किया दाखिल
आतंकी षड्यंत्र में शामिल तीन में से दो डाॅक्टरों को एनआईए ने गिरफ्तार किया है, जबकि तीसरा डाॅक्टर लाल किले के पास हुए विस्फोट का आत्मघाती हमलावर था। ईडी ने मामले में लगभग 260 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। ईडी का दावा है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय के प्रमोटर और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चल रही मनी लांड्रिंग जांच के दौरान दर्ज बयानों और दस्तावेज के आधार पर किए गए हैं।
कई डाॅक्टरों को केवल कागजों पर नियुक्त किया
आरोपपत्र में 61 वर्षीय जावेद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को आरोपित बनाया गया है, जो विश्वविद्यालय और उससे जुड़े शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करता है। आरोपपत्र के अनुसार, मेडिकल कालेज में कई डाॅक्टरों को केवल कागजों पर नियुक्त किया गया था। ईडी ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, कुलपति और प्रधानाचार्य के बयान दर्ज किए हैं।
कुलपति ने स्वीकार किया कि आतंकी गतिविधियों से जुड़े डा. मुजम्मिल गनई, डा. शाहीन सईद और डा. उमर नबी की नियुक्तियां उनके कार्यकाल में हुई थीं और इनकी सिफारिश एचआर विभाग ने की थी, जबकि नियुक्ति को अंतिम मंजूरी जावेद सिद्दीकी ने दी थी। उन्होंने यह भी माना कि इन नियुक्तियों के दौरान कोई पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया।
जांच में मिली हैं कई खामियां
ईडी का आरोप है कि मेडिकल काॅलेज में ऑनपेपर डाॅक्टरों को केवल नियामक निरीक्षण के समय तैनात किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि निरीक्षण से कुछ हफ्ते पहले अस्पताल लगभग गैर-कार्यात्मक था और निरीक्षण से ठीक पहले फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाया गया।
एजेंसी का दावा है कि जावेद सिद्दीकी ने इस पूरे मामले में केंद्रीय और नियंत्रक भूमिका निभाई। जांच में अब तक करीब 493.24 करोड़ रुपये की अपराध की आय सामने आई है, जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूली गई।
ईडी के अनुसार, यह जांच अभी जारी है और मार्च 2025 के बाद के वित्तीय आंकड़ों को शामिल करते हुए एक पूरक आरोपत्र भी दाखिल किया जा सकता है।
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