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अंबाला थाने को उड़ाने की खौफनाक साजिश, सिग्नल एप पर मिली लोकेशन; झाड़ियों से उठाया था विस्फोटक

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अंबाला थाने को उड़ाने की खौफनाक साजिश। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, अंबाला शहर। बलदेव नगर थाने को उड़ाने की साजिश अब सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि सोची-समझी, तकनीकी और संगठित प्लानिंग का मामला बनती जा रही है।

जांच में खुलासा हुआ है कि फिरोजपुर निवासी सगे भाई सौरभ और आकाश को सिग्नल एप के जरिए विस्फोटक खेतों में पड़े होने की सूचना दी गई थी। इसके बाद दोनों ने वहां से विस्फोटक उठाया और अंबाला पहुंचकर थाने को निशाना बनाने की तैयारी की।

शुक्रवार को सीआइए-1 की टीम दोनों आरोपितों को लेकर उन होटलों और ठिकानों पर पहुंची, जहां वे ठहरे थे और जहां से उन्होंने पूरी साजिश को अंजाम दिया। पुलिस ने उन्हें उस दुकान तक भी पहुंचाया, जहां से सिलिंडर खरीदे गए थे।

अगला पड़ाव फिरोजपुर और मुक्तसर रहेगा, जहां से विस्फोटक मिलने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, साजिश की पूरी बातचीत सिग्नल एप पर होती थी, ताकि किसी भी तरह का डिजिटल सुराग हाथ न लगे। आरोपी जानते थे कि सिग्नल एप की चैट ट्रेस करना मुश्किल होता है, इसलिए उन्होंने इसी प्लेटफार्म को चुना। पुलिस को आशंका है कि इसी चैनल के जरिए बाकी साथी भी जुड़े हुए थे।
एलईडी के भीतर छिपाया था विस्फोटक

कार को बलदेव नगर थाने के बाहर खड़ा करने वाला कर्मजीत और अन्य आरोपी भी इसी नेटवर्क का हिस्सा थे। जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने टूटी हुई एलईडी के भीतर विस्फोटक छिपाया था, ताकि शक न हो। इतना ही नहीं, होटल 3एनएन और आर्चिट में फर्जी आईडी पर कमरे लिए गए, जिससे पहचान छिपाई जा सके।
एनआईए और पंजाब पुलिस भी अलर्ट

इस सनसनीखेज साजिश के तार अब हरियाणा से निकलकर पंजाब तक जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पंजाब के कौन-कौन से गैंग इस पूरे खेल में शामिल हैं और आरोपितों के कहां-कहां लिंक जुड़े हुए हैं।

इसी कड़ी में एनआइए और पंजाब पुलिस की टीमों से भी मदद ली जा रही है। एसपी अजीत सिंह शेखावत खुद शुक्रवार को सीआइए-1 पहुंचे और आरोपितों से पूछताछ की। साथ ही जांच टीम से केस की पूरी प्रगति रिपोर्ट ली। पुलिस अब भी उन दो आरोपितों की तलाश में जुटी है, जो सौरभ और आकाश के साथ अंबाला के होटलों में ठहरे थे और साजिश का हिस्सा थे।
विस्फोटक की किस्म और क्षमता पर सस्पेंस

उधर, पुलिस की निगाहें अब एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की केमिकल जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यही रिपोर्ट बताएगी कि मारुति 800 कार में किस तरह का विस्फोटक रखा गया था और उसकी वास्तविक क्षमता कितनी थी।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि विस्फोटक आरडीएक्स जैसा हाई-इंटेंसिटी था या कोई अन्य केमिकल आधारित पदार्थ। रिपोर्ट से यह भी पता चलेगा कि विस्फोटक तैयार हालत में लाया गया था या मौके पर जोड़कर तैयार किया गया (इम्प्रोवाइज्ड डिवाइस)। इसी आधार पर आगे की धाराएं और जांच की दिशा तय होगी।
परिवारों के खाते भी स्कैन, विदेशी फंडिंग एंगल से जांच

जांच एजेंसियां यहीं नहीं रुकीं। सौरभ और आकाश के साथ-साथ उनके परिवार के सभी सदस्यों के बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी के खाते में विदेशी फंडिंग या संदिग्ध लेनदेन तो नहीं हुआ।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि परिवार का कोई और सदस्य इस साजिश में तो शामिल नहीं था। साथ ही, आरोपितों के मोबाइल काल डिटेल रिकार्ड और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाले जा रहे हैं, ताकि एक-एक कड़ी को जोड़कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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