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विवाह पंजीयन सिर्फ 100 रुपये में: कानूनी सुरक्षा के लिए जरूरी, देरी पर बढ़ेंगी मुश्किलें

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सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, पटना। सौ रुपये के शुल्क में होने वाला विवाह पंजीयन बहुत जरूरी है। लोगों को इसका महत्व तब पता चलता है जब कोई कानूनी-प्रशासनिक जटिलता सामने आ जाती है। जिले की 65 लाख की आबादी में करीब 16 प्रतिशत लड़कियां व 19 प्रतिशत लड़के शादी की उम्र के हैं।

अनुमान के अनुसार, प्रति वर्ष जिले में 20 हजार से अधिक शादियां होती हैं। वहीं पंजीयन कराने वालों की संख्या प्रतिवर्ष औसतन 2500 है। इसमें सोलो या कोर्ट मैरिज के आंकड़े भी शामिल हैं। सब रजिस्ट्रार राजीव रंजन के अनुसार राजधानी में तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद अभी विवाह पंजीयन जरूरत पड़ने पर ही कराया जा रहा है।

पासपोर्ट, बैंक, बीमा, पेंशन, या अन्य कानूनी-प्रशासनिक कार्यों में जरूरत होने पर लोग विवाह पंजीयन कराते हैं। यही कारण है कि अधिसंख्य विवाह पंजीयन शादी के कई वर्षों बाद कराए जाते हैं। बताते चलें कि 2023 से अप्रैल 2025 तक प्रदेश में 18 हजार 465 विवाह निबंधित कराए गए।

इस दौरान पांच हजार 693 सोलो या कोर्ट मैरिज भी हुईं। विवाह निबंधन में पटना सबसे अधिक है। इसी अवधि में पटना में चार हजार 138 कोर्ट मैरिज हुईं, जबकि चार हजार 439 विवाह निबंधित हुए।
आवश्यक कानूनी दस्तावेज है विवाह पंजीयन

पारंपरिक तरीके से किया विवाह-निकाह सामाजिक रूप से मान्य है लेकिन भविष्य में किसी कानूनी या प्रशासनिक जटिलता के आने पर उसे साबित करने का कोई तरीका नहीं है। यदि पारंपरिक विवाह के बाद सब रजिस्ट्रार कार्यालय में इसका निबंधन करा लिया जाए तो यह एक कानूनी दस्तावेज बन जाता है।

यह न केवल भविष्य की कानूनी उलझनों से बचाता है बल्कि दंपत्ति के अधिकारों व सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करता है। सब रजिस्ट्रार ने बताया कि विवाह के तुरंत बाद विवाह पंजीयन कराने पर सौ और वर्षों बाद कराने पर दो सौ रुपये का शुल्क लगता है। वहीं कोर्ट मैरिज का शुल्क तीन सौ रुपये है। यदि विवाह के तुरंत बाद पंजीयन करा लिया जाए तो भविष्य में अनेक समस्याओं से बचा जा सकता है।
विवाह निबंधन की जरूरत क्यों

विवाह का निबंधन पति-पत्नी के वैवाहिक संबंध को सरकारी मान्यता प्रदान करता है। इसके अभाव में विशेषकर महिलाओं को अपने अधिकारों के संरक्षण, उत्तराधिकार तय कराने व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। राजधानी में पासपोर्ट, वीजा, बैंक खाते, बीमा, पेंशन, पारिवारिक लाभ या संपत्ति से जुड़े कार्यों में विवाह प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ने पर निबंधन कराने वालों की संख्या अधिक है।
देरी पर दस्तावेज, गवाह व प्रमाण जुटाने में दिक्कत

प्रदेश में विवाह पंजीयन विशेष विवाह अधिनियम, 1954 व बिहार विवाह पंजीयन नियमावली 2006 के तहत किया जाता है। इसके लिए दंपति को नजदीकी निबंधन कार्यालय (सब रजिस्ट्रार कार्यालय) में ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन देना होता है। तय समय में पंजीयन नहीं कराने पर दस्तावेज़ों की उपलब्धता, गवाहों की पहचान व विवाह के प्रमाण जुटाने में परेशानी होती है। इससे प्रक्रिया लंबी व जटिल हो सकती है जबकि विवाह के तुरंत बाद पंजीयन कराने से प्रक्रिया सरल, पारदर्शी व समयबद्ध रहती है।
आवेदन को जरूरी दस्तावेज

  • पहचान प्रमाण आधार या पैन कार्ड आदि।
  • आयु प्रमाण में जन्म प्रमाणपत्र, मैट्रिक सर्टिफिकेट।
  • आवासीय पता का प्रमाण, बिजली बिल, जमीन-मकान आदि।
  • विवाह का प्रमाण (विवाह कार्ड या फेरे-निकाह के फोटोग्राफ)
  • दो गवाह व उनके पहचान प्रमाणपत्र जैसे आधार व दो फोटो ।
  • दो पासपोर्ट साइज के फोटो,
  • आपत्ति मांगने व जांच के बाद करीब 30 दिन बाद पति-पत्नी दोनों को प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

विवाह पंजीयन के फायदे

  • महिला को सामाजिक सुरक्षा देते हुए उसके अधिकारों, उत्तराधिकार व संपत्ति दावों को सुरक्षित बनाता है।
  • वीजा, पासपोर्ट, बैंकों, बीमा, नौकरी आदि में विवाह प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है।
  • फर्जी दावों व झूठे दावों से सुरक्षा देता है।
  • दंपती को गलत दावा या धोखाधड़ी से कानूनी सुरक्षा देता है।
  • भविष्य में किसी भी विवाद या जरूरत के समय यह दस्तावेज महत्वपूर्ण साबित होता है।
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