महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हुए हैं, जिसने 25 सालों से ज्यादा समय बाद शिवसेना से मुंबई की इस गढ़ पर कब्जा कर लिया है। भाजपा और ठाकरे परिवार के बीच चल रही इस भीषण चुनावी लड़ाई के बीच कांग्रेस के लिए भी कुछ अच्छी खबर है।
यह चुनाव कम से कम चार पार्टियों के लिए झटके वाले रहे - शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की MNS, जिन्होंने मिलकर बालासाहेब ठाकरे की विरासत का लाभ उठाने की कोशिश की, फिर NCP के दो प्रतिद्वंद्वी गुट, जो अस्थायी तौर पर साथ आने के बावजूद पुणे, पिंपरी-चिंचवड के गढ़ में समर्थन जुटाने में विफल रहे।
स्थानीय चुनावों में अकेले मैदान में उतरी कांग्रेस मुंबई में कोई खास बढ़त ने ही बना पाई, हालांकि, राज्य में हुए नगर निगम चुनावों में उसका प्रदर्शन ठाकरे भाइयों के गठबंधन या पवार चाचा भतीजा से बेहतर था।
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अकेले चुनाव लड़ने और कुल 2,869 सीटों में से केवल 528 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद, इस पुरानी पार्टी ने सभी नगर निकायों में 227 सीटें हासिल करने में कामयाबी हासिल की।
शुक्रवार को दोपहर 3 बजे तक के रुझानों के अनुसार, मुंबई में सीटों के मामले में पार्टी चौथे नंबर पर थी, जबकि 29 नगर निगम चुनावों में यह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी रही। BMC चुनावों में, पार्टी ने 167 सीटों में से 10 सीटें जीतीं।
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों के नतीजों में कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है। इन चुनावों में BJP 1,172 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना 200 सीटों के साथ दूसरे और कांग्रेस 227 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही है।
कांग्रेस का दबदबा
जहां भाजपा ने मुंबई, पुणे, नासिक और नागपुर जैसे बड़े शहरों में अपना परचम लहराया, वहीं कांग्रेस ने भिवंडी-निजामपुर, कोल्हापुर, अमरावती, चंद्रपुर और लातूर में अपनी बढ़त बनाए रखी। लातूर में तो पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा भी पार कर लिया है।
1999 के बाद यह पहली बार था, जब कांग्रेस ने किसी गठबंधन के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। पार्टी ने मुंबई, ठाणे और पुणे समेत कई बड़े नगर निगमों में 528 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, और उनके इस प्रदर्शन को काफी प्रभावशाली माना जा रहा है।
गठबंधन का बदलता स्वरूप
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों के बाद कांग्रेस ने यह कदम उठाया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने और पवार परिवार के गुटों में आपसी तालमेल के बीच कांग्रेस ने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की।
2019 में कांग्रेस ने \“महा विकास अघाड़ी\“ सरकार का हिस्सा बनकर सत्ता का सुख देखा था, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनावों में पार्टी केवल 16 सीटों के साथ पांचवें नंबर पर खिसक गई थी। हालांकि, एक साल बाद ही नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस ने वापसी की और उद्धव गुट व NCP गुटों को पीछे छोड़ते हुए राज्य में तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
मुंबई में भी कांग्रेस का प्रदर्शन काफी चर्चा में है। यहां पार्टी भाजपा-शिंदे गठबंधन और उद्धव गुट की शिवसेना के बाद 13 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है, लेकिन उसने MNS और NCP के दोनों गुटों को पीछे छोड़ दिया है। |