search

ब्राह्मणों के ‘आशीर्वाद’ को बेचैन उत्तर प्रदेश के राजनीति दल, SP व BSP ने दिया खुला आफर

LHC0088 2 hour(s) ago views 512
  

याेगी आदित्यनाथ, मायावती, राहुल गांधी, अखिलेश यादव



दिलीप शर्मा, जागरण, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावी रण के लिए जातियों में हिस्सेदारी को अभी से घमासान शुरू हो गया है। राजनीतिक बयानों में भले ही पिछड़े और दलितों का बोलबाला हो, परंतु चुनावी तरकश में ब्राह्मणों के साथ का ‘ब्रह्मास्त्र’ भी सजाने की तैयारी है।

समाज की दिशा और राजनीतिक समर्थन का माहौल तैयार करने में ब्राह्मणों के योगदान की क्षमता सभी राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाती है। ऐसे में भाजपा, सपा, बसपा सहित सभी राजनीतिक दल अगले चुनाव के लिए ब्राह्मणों का ‘आशीर्वाद’ पाने को बेचैन हैं।

यही वजह है कि भाजपा विधायकों की बैठक के बाद नजर आई उपेक्षा की हल्की सी चिंगारी को जमकर हवा दी जा रही है। पहले सपा ने खुलकर आफर दिया और अब मायावती ने अपने जन्मदिन पर इस समाज की सम्मान वाली दुखती रग पर हाथ रखने की कोशिश की। दोनों ही दल पूरी रणनीति के साथ ब्राह्मणों में पैठ बनाने की कोशिश में हैं, इससे भाजपा भी बेचैनी महसूस कर रही है।
सौ से अधिक सीटों पर सीधा प्रभाव

प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी दस से 12 प्रतिशत मानी जाती है, परंतु चुनावी लिहाज से ब्राह्मणों के साथ अहम है। 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण समाज का सीधा प्रभाव है और अप्रत्यक्ष प्रभाव लगभग पूरे प्रदेश में दिखता है। वर्ष 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने में ब्राह्मणों के समर्थन को बड़ी वजह माना जाता है। उस चुनाव में मायावती ने ब्राह्मणों को साथ लेकर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को अपनाया था और 50 से अधिक को टिकट दिया था। तब 41 ब्राह्मण विधायक बने थे।

वहीं वर्ष 2012 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब उसके 20 से अधिक ब्राह्मण विधायक थे। इसके बाद वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से भी खासी संख्या में ब्राह्मण विधायक बने। लंबे समय से इस समाज को भाजपा का स्वाभाविक वोटर माना जाता है, परंतु पिछले कुछ समय से लगातार भाजपा के अंदर ब्राह्मणों की अनदेखी और पर्याप्त सम्मान न मिलने की सवाल उठ रहे हैं।  
ब्राह्मण विधायकों की बैठक रही अहम

भाजपा अगड़ों को तो साधे है, पर उसने भी उसका ज्यादा जोर दलित, पिछड़ों आदि वर्गों को जोड़ने पर है। काफी समय से प्रदेश में क्षत्रियों को ज्यादा तवज्जो मिलने की बात भी उठ रही है। इस बीच विधानमंडल सत्र के दौरान 23 दिसंबर को ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद से प्रदेश की राजनीति गर्माई हुई है।

बसपा सुप्रीमो ने अपने जन्मदिन पर इस बैठक के हवाले से भाजपा के अंदर ब्राह्मणों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने अपनी पूर्व सरकार का उल्लेख कर ब्राह्मणों को पूरा सम्मान देने का वादा भी कर डाला। इससे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव ने भाजपा विधायकों को अपनी पार्टी में आने का खुला आफर दिया था।
सपा अगड़ों को जोड़ने में लगी

सपा अपनी पीडीए की रणनीति के साथ अगड़ों को भी जोड़ने पर लगातार काम कर रही है। सबसे ज्यादा ब्राह्मणों को साथ लाने पर है और इसके लिए चलते ही साफ्ट हिंदुत्व के भाव को भी उभारा जा रहा है। दूसरी तरफ बसपा अपने संगठन में ब्राह्मणों को शामिल करने पर जोर दे रही है और अगले चुनावों में वर्ष 2007 की तरह ही बड़ी संख्या में ब्राह्मणों को टिकट देने की भी तैयारी में है।  
विरोधियों को अप्रभावी ठहराने में जुटी भाजपा

भाजपा फिलहाल तो विरोधियों को अप्रभावी ठहराने में जुटी है, परंतु अंदरखाने इस चुनौती को हल्के में नहीं लिया जा रहा। विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत पाने को जातीय गोलबंदी की रणनीति में ब्राह्मण समाज का साथ महत्वपूर्ण है और वह अपने इस पुराने वोट बैंक को हाथ से नहीं जाने देना चाहती। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में जगह देकर इस समाज को साधा जाएगा। हालांकि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, यह घमासान और तेज होगा।
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
151159

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com