तीन दिवसीय मारवाड़ महोत्सव की रंगारंग शुरुआत।
जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची में आज से राजस्थान की जीवंत संस्कृति का जादू छा गया है। हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन में तीन दिवसीय मारवाड़ महोत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन हुआ, जहां झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
यह आयोजन झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन और मारवाड़ी सहायक समिति के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है, जो मारवाड़ी समुदाय की समृद्ध विरासत को जीवंत कर रहा है।
रांची में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित यह महोत्सव 18 जनवरी तक चलेगा, जिसमें लोक कला, नृत्य, संगीत, हास्य और स्वादिष्ट व्यंजनों का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
राज्यपाल का राजसी स्वागत
समारोह की शुरुआत राज्यपाल संतोष गंगवार ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका और राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता भी मौजूद रहे।
यह महोत्सव मारवाड़ी संस्कृति के गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास है। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, महामंत्री विनोद कुमार जैन और मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा, यह आयोजन न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का अवसर भी है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत एयरपोर्ट पर किया गया
राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका का रांची पहुंचने पर एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन और रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों ने उन्हें पुष्प गुच्छ और अंग वस्त्र से सम्मानित किया।
गोयनका महोत्सव के उद्घाटन सत्र में भाग लेने के साथ-साथ 17 जनवरी को प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी शामिल होंगे।
स्वागत करने वालों में सुरेश चंद्र अग्रवाल, कौशल राजगढ़िया, मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, निर्मल बुधिया, अशोक नारसरिया और रमण बोड़ा जैसे प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे।
40 कलाकारों का जादू: घूमर से तक सब कुछ
मारवाड़ महोत्सव में राजस्थान से आए 40 से अधिक प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। यहां घूमर नृत्य की थिरकन, कालबेलिया की जोशीली धुनें, लोकगीत, लोकनाट्य और हास्य कार्यक्रमों का बोलबाला है।
आयोजकों ने बताया कि महोत्सव में \“चोखी धाणी\“ स्टाइल में राजस्थानी व्यंजनों का मजा लिया जा सकता है, जहां दाल-बाटी-चूरमा से लेकर गट्टे की सब्जी तक के स्वादिष्ट पकवान परोसे जा रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलकियां
- मेहंदी रचनी: पारंपरिक डिजाइनों से सजे हाथों की रंगत।
- अपणी माटी रो गीत: मिट्टी से जुड़े मधुर लोकगीत जो दिल को छू लेते हैं।
- पगड़ी रो पेंच: मारवाड़ी शान की प्रतीक पगड़ी बांधने की कला और प्रतियोगिता।
- कुण है फुतारो: पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतियोगी, जहां संस्कृति की झलक मिलेगी।
- हंस लो सा: हास्य से भरपूर मनोरंजन जो दर्शकों को हंस-हंस कर लोट-पोट कर देगा।
- राजस्थान री रास: नृत्य और संस्कृति का राजसी संगम, जो राजस्थान की जीवंत परंपराओं को जीवंत करता है।
- रंग भरो राजस्थान: रंगीली रचनाओं की छंटा, जहां कला और रंगों का मिलन होता है।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि महोत्सव की तैयारियां महीनों से चल रही थीं।
मुख्य संयोजक अरुण भरतीया, अनुज अग्रवाल, विकास मोदी के साथ सह-संयोजक अभिषेक झाझरिया, डॉली केजरीवाल, शशांक बजाज, मोनिका अग्रवाल, विनीता सिंघानिया, कुणाल जालान, शैलेश अग्रवाल, निकुंज पोद्दार और रमन बोड़ा आदि इसे सफल बनाने में लगे हुए हैं।
परिवार सहित पहुंचें, एंट्री सिर्फ 50 रुपये
आयोजकों ने रांचीवासियों से अपील की है कि वे परिवार सहित इस महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। एंट्री फीस मात्र 50 रुपये रखी गई है, ताकि हर कोई राजस्थान की खुशबू और मारवाड़ी संस्कृति का आनंद ले सके।
सर्राफ ने कहा, “यह महोत्सव न सिर्फ मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम भी है। रांची में पहली बार ऐसा आयोजन हो रहा है, जो शहर की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देगा।“
महोत्सव के दौरान 17 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी होगी, जहां मारवाड़ी समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
आयोजन के अंतिम दिन 18 जनवरी को समापन समारोह में और भी रंगारंग कार्यक्रम होंगे। रांची के सांस्कृतिक प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर है, जहां राजस्थान घर बैठे आ गया है। |