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रिम्स में बढ़ता मरीजों का भरोसा: एक साल में 8.5 लाख से अधिक ओपीडी, 63 हजार सर्जरी

Chikheang 1 hour(s) ago views 392
  

एक साल में 8.5 लाख से अधिक ओपीडी मरीज।



जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है।

अस्पताल की ताजा वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में रिम्स की ओपीडी में 8 लाख 58 हजार से अधिक मरीजों ने इलाज कराया, जबकि 78 हजार से ज्यादा मरीजों को इंडोर यानी आइपीडी सेवाएं दी गई।

ये आंकड़े न सिर्फ रिम्स की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि राज्य के लोग अब जटिल बीमारियों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करने लगे हैं।
हजारों सर्जरी, जटिल इलाज में भी इजाफा

रिपोर्ट के अनुसार, वर्षभर में रिम्स में कुल 63,926 सर्जरी की गईं। इनमें 20,995 मेजर आपरेशन शामिल हैं, जबकि 42,931 माइनर सर्जरी की गई।

मेजर सर्जरी की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि अब हार्ट, ब्रेन, कैंसर, ट्रामा और अन्य जटिल बीमारियों का इलाज रिम्स में बड़े स्तर पर संभव हो रहा है। इससे मरीजों को बाहर के निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों में रेफर होने की मजबूरी भी कम हुई है।
जांच सुविधाओं पर भी बढ़ा भरोसा

रिम्स में डायग्नोस्टिक सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में कुल 1,40,779 रेडियोलाजी जांच की गई। इनमें 90,758 एक्स-रे, 23,868 अल्ट्रासाउंड और 26,153 सीटी स्कैन शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच उपलब्ध होने से गंभीर बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही निदान संभव हो पा रहा है, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ी है।
लैब सेवाओं पर भारी दबाव

पैथोलाजी और सेंट्रल लैब सेवाओं में भी रिकार्ड संख्या में जांच की गई। सेंट्रल लैब में कुल 8,92,531 जांच दर्ज की गई।

इनमें हेमेटोलाजी विभाग में 1.75 लाख से अधिक जांच, क्लिनिकल पैथोलाजी में 25,625 जांच, माइक्रोबायोलाजी में 2.72 लाख से अधिक और वायरलाजी व एसपी मालिक्यूलर जांच की संख्या 1.82 लाख रही। यह आंकड़े बताते हैं कि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा डायग्नोस्टिक हब बनता जा रहा है।
हृदय रोगियों को मिली बड़ी राहत

कार्डियोलाजी विभाग में भी मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार एक साल में 35,735 ईसीजी, 17,580 ईको, 1,248 टीएमटी और 302 होल्टर टेस्ट किए गए। इससे बीपी, हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों की समय पर पहचान और इलाज संभव हो सका।
मातृ-शिशु सेवाओं में भी अहम योगदान

रिम्स ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षभर में अस्पताल में 5,214 प्रसव कराए गए, जिनमें 2,773 बालक और 2,441 बालिकाओं का जन्म हुआ।

वहीं, 10,165 मौतें दर्ज की गई, जो यह दर्शाती हैं कि रिम्स एक तृतीयक रेफरल सेंटर होने के कारण राज्यभर से गंभीर और जटिल मरीजों का दबाव झेलता है।
टीकाकरण में भी सक्रिय भूमिका

रिम्स में वर्षभर में कुल 33,505 टीकाकरण किए गए। इसमें बीसीजी, डीपीटी, पेंटावैक, ओपीवी, रोटा वायरस, पीसीवी, हेपेटाइटिस-बी सहित अन्य आवश्यक टीके शामिल हैं।

इससे बच्चों और आम लोगों को कई संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा मिली। रिम्स निदेशक डा. राजकुमार के अनुसार ये आंकड़े बताते हैं कि रिम्स अब केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए जीवनरेखा बन चुका है।

सीमित संसाधनों और बढ़ते मरीज दबाव के बावजूद रिम्स द्वारा दी जा रही सेवाएं यह संकेत देती हैं कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
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