दिल्ली में प्रदूषण का बच्चों पर गहरा असर पड़ रहा है। जागरण
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का सबसे गहरा असर अब बच्चों पर दिखने लगा है।दुकानों पर बच्चों के लिए सांस की दवाएं, इनहेलर और नेब्युलाइजर तेजी से बिक रहे हैं। माता-पिता कहते हैं कि जो दवाएं पहले कभी-कभार ली जाती थीं, अब नियमित जरूरत बन गई हैं।
हालिया सर्वे में सामने आया है कि श्वसन संबंधी दवाएं खरीदने वालों में हर तीसरा ग्राहक बच्चों के लिए यह सामान ले रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों की सांस की नलियां ज्यादा संवेदनशील होती हैं और खराब हवा का असर उन पर जल्दी होता है।
अध्ययन बताते हैं कि दिल्ली में जब पीएम 2.5, पीएम 10 और एक्यूआई का स्तर बढ़ता है, तो अस्पतालों में सांस और दिल से जुड़ी आपात स्थितियां भी बढ़ जाती हैं। वहीं साफ हवा वाले शहरों में ऐसा दबाव देखने को नहीं मिलता।
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बाल रोग विशेषज्ञों की चिंता है कि अगर हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ी बचपन से ही सांस की बीमारियों के साथ जीने को मजबूर होगी। |
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