सर सुंदरलाल अस्पताल में प्रतिदिन आते सात हजार से अधिक मरीज। जागरण
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पूर्वांचल के एम्स कहे जाने वाले बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में अब मरीजों को लंबी कतारों और बेड की कमी से जल्द राहत मिलेगी। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर अस्पताल के बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने की प्रक्रिया आरंभ की गई है।
अस्पताल में रोजाना बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए नया ओपीडी ब्लाक बनाने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि यहां पर प्रतिदिन सात हजार से अधिक मरीज आते हैं। यह मरीज पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल, झारखंड और नेपाल के होते हैं।
भीड़ प्रबंधन नहीं होने की वजह से आए दिन डाक्टरों और मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को तीन दिन पहले आई स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने महसूस किया है। विश्वविद्यालय से विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई है।
विश्वविद्यालय निर्माण विभाग को नए ब्लाक के डिजाइन पर काम शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही, पुराने वार्डों और भवनों का जीर्णोद्धार कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। अत्याधुनिक मशीनें होने के बावजूद विशेषज्ञों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी अस्पताल के लिए बड़ी चुनौती रही है। इस समस्या को सुलझाने के लिए प्रशासन ने वेतनमान में वृद्धि करने की दिशा में कदम उठाए हैं, ताकि योग्य पेशेवरों को आकर्षित किया जा सके।
मरीजों के सभी रिकार्ड को पूरी तरह डिजिटल किया जाएगा ताकि कागजी कार्रवाई का बोझ कम हो सके। आइआइटी बीएचयू के सहयोग से विकसित किए जा रहे चिकित्सा उपकरणों का सफल क्लीनिकल ट्रायल कराकर उन्हें पेटेंट कराने की प्रक्रिया को एजेंडे में शामिल किया गया है।
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रामसूरत सुबह लाइन में लगे, शाम को करा सके उपचार
बलिया के रामसूरत पांडेय (55 वर्ष) एक सप्ताह पहले घुटने के पुराने दर्द का इलाज कराने के लिए जनरल मेडिसिन विभाग की ओपीडी आए थे। वह रात 12 बजे बलिया से चलते और सुबह पांच बजे ओपीडी की लाइन में लगते हैं। काउंटर खुलने तक उनके आगे 200 लोग होते हैं। पर्चा बनवाते-बनवाते दोपहर के 12 बज जाते हैं और डॉक्टर से मिलने तक शाम हो जाती है।
भीड़ के कारण उन्हें बैठने की जगह भी नहीं मिल पाई। जाहिर है कि नया ओपीडी ब्लाक बनेगा तो काउंटर और वेटिंग एरिया का दायरा बढ़ेगा। डिजिटल रिकार्ड और आनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा से उनके जैसे मरीजों को लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। उनके पुराने रिकार्ड्स एक क्लिक में उपलब्ध होंगे, जिससे जांच व परामर्श में समय बचेगा।
मंत्रालय के अधिकारियों ने भीड़ प्रबंधन की समस्या को महसूस किया है, इस पर काम शुरू हुआ है। कुलपति को संज्ञान में लाने के बाद योजना को अमल में लाया
जाएगा। -
-प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आइएमएस बीएचयू |
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