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मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया से संबंधित एक उच्चस्तरीय संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन गुरुवार को पुराना सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी, विधिसम्मत एवं न्यायोचित हो और प्रक्रियागत त्रुटियों से बचा जा सके।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की जबकि सह अध्यक्षता महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने की। प्रशिक्षण सत्र का मुख्य विषय अनुशासनात्मक कार्रवाई रहा। दीपक कुमार सिंह ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सभी परिपत्रों को संकलित कर इस विषय पर एक मास्टर सर्कुलर जारी किया गया है।
साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 311 सहित अन्य प्रासंगिक प्रविधान और हाईकोर्ट-सुप्रीमो कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों को एकत्र कर एक पुस्तक का संकलन किया गया है। ताकि, अनुशासनात्मक मामलों में होने वाली कार्रवाई एवं प्रक्रिया की समग्र और स्पष्ट समझ विकसित की जा सके।
सत्र के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी भी जांच समय सही शब्दावली एवं विधिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। इस संदर्भ में कुछ सामान्य त्रुटियों से बचने की आवश्यकता पर चर्चा की गई, जिनमें बिना आरोप-पत्र गठित किए सीधे लघु दंड देना, अनुशासनिक प्राधिकारी या प्रशासनिक विभाग से आरोपित पदाधिकारी के प्रतिरक्षा कथन पर राय मांगना तथा दंड की मात्रा, निलंबन अवधि के दौरान देय भत्तों एवं निलंबन की अवधि के समायोजन संबंधी आदेश एक ही संकल्प में जारी करना शामिल है।
स्पष्ट किया गया कि स्तर-9 एवं उससे ऊपर के पदाधिकारियों के मामलों में दंडादेश जारी करने से पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श अनिवार्य है। सत्र में विकास विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, राजस्व परिषद की अध्यक्ष हरजोत कौर बम्हरा, सामान्य प्रशासन के अपर मुख्य सचिव डा. बी. राजेंदर, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। |
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