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ITBP और उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक समझौता, चीन सीमा से लगने वाले गांवों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

cy520520 2026-1-15 20:27:11 views 946
  

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आइटीबीपी के साथ एमओयू हुआ। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी मौजूद रहे। सूचना विभाग



राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली नागरिक आबादी को अब बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) राज्य के सीमांत जनपद पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के अंतर्गत स्थित 108 सीमावर्ती गांवों में एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन करेगी।

इसके लिए उत्तराखंड सरकार और आइटीबीपी के बीच स्वस्थ सीमा अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास पर यह एमओयू हुआ। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डा धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी मौजूद रहे। यह अभियान चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा, जिसके पहले चरण में दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

एमओयू के तहत आइटीबीपी मुख्यालय उत्तरी सीमांत, देहरादून को प्रथम पक्ष तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड सरकार को द्वितीय पक्ष बनाया गया है। समझौते के अनुसार आइटीबीपी योग्य चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, एमआइ रूम और टेली-मेडिसिन सुविधाओं की व्यवस्था करेगी।

आइटीबीपी की टीम नियमित रूप से सीमावर्ती गांवों का भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएंगी एवं मेडिकल हेल्थ कार्ड और रिकार्ड का संधारण भी किया जाएगा।

वहीं राज्य सरकार संबंधित गांवों के जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी और प्रारंभिक चरण में आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्रदान करेगी। दवाइयों और उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति प्रत्येक छह माह में सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों में निकासी, दूरसंचार सहायता और आवश्यक प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार निभाएगी।
‘स्वस्थ सीमा अभियान’ सीमावर्ती क्षेत्रों को वरदान : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी और ऐतिहासिक पहल है।

इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि सीमावर्ती गांवों में सुरक्षा, विश्वास और स्थायित्व भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह एमओयू उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय उत्पादों की खरीद को लेकर सकारात्मक परिणाम

इस अवसर पर आइटीबीपी अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय उत्पादों की खरीद को लेकर पूर्व में किए गए एमओयू के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे पशुपालकों, मत्स्य पालकों और दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और ‘वोकल फार लोकल’ को सशक्त करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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