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हैरान करने वाला मामला, बर्खास्तगी के छह साल बाद कर्मचारी को कर दिया बहाल, MD समेत दो सस्पेंड

cy520520 1 hour(s) ago views 881
  

सहकारी समिति तुगलकपुर खाईखेड़ी   



संजीव तोमर, जागरण, मुजफ्फरनगर। किसानों को उर्वरक और ऋण देने वाली समितियों में अनियमितता की जड़ें गहरी हैं। भोपा सहकारी समिति में बीते दिनों कर्मचारी पर भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है।

वहीं सहकारी समिति तुगलकपुर खाईखेड़ी में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस कर्मचारी को छह साल पहले भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था, उसे समिति के एमडी ने बहाल कर दिया। अब एमडी और कर्मचारी दोनों को जिला स्तरीय निगरानी समिति ने सस्पेंड कर दिया है।

वर्ष 2015 में सहकारी समिति तुगलकपुर खाईखेड़ी में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया था। समिति में लेखा संबंधित कार्य देख रहे कर्मचारी सत्यवीर सिंह ने चार किसानों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था, जबकि इन किसानों पर समिति का 37 लाख रुपये का कर्ज था और इनकी जमीन समिति में बंधक थी।

उच्चाधिकारियों से कर्ज और जमीन की बात छिपाई गई, जिसके बाद किसानों ने अपनी जमीन बेच दी। जिन किसानों ने जमीन खरीदी, उन्हें समिति की ओर से कर्ज अदा करने का नोटिस जारी किया गया। उन्होंने समिति की ओर से जारी एनओसी दिखाई, जिसके चलते मामले का राजफाश हुआ।

प्रकरण पर जांच बैठी और जांच में कर्मचारी की करतूत सामने आई, जिसके चलते सत्यवीर सिंह को पहले सस्पेंड किया गया और फिर बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, बर्खास्त कर्मचारी ने वर्ष 2021 में समिति के एमडी राजीव कुमार से साठगांठ कर ली, जिसके चलते एमडी ने कर्मचारी को बहाल कर दिया।
इस मामले की शिकायत होने पर जिला स्तरीय निगरानी समिति ने जांच की। अब एमडी राजीव कुमार और सत्यवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया है। दोनों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए जांच चल रही है।

जिलास्तरीय निगरानी समिति की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

समितियों में अनियमितताओं को लेकर समिति स्तर पर प्राथमिक जांच होती है। गंभीर मामलों की जांच जिला स्तरीय निगरानी समिति करती है, जिसमें मुजफ्फरनगर डिस्ट्रिक्ट को-आपरेटिव बैंक लिमिटेड के सभापति रामनाथ सिंह अध्यक्ष और एआर को-आपरेटिव अरिमर्दन सिंह सदस्य सचिव हैं। साथ ही चार सदस्य भी हैं। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही समिति एमडी पर कार्रवाई होती है।
इन्होंने कहा...

सहकारी समिति तुगलकपुर खाईखेड़ी में एमडी ने गलत तरीके से बर्खास्त कर्मचारी को बहाल कर दिया, जिसके चलते दोनों पर निलंबन की कार्रवाई की है। एमडी और कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से वहां हटा दिया है। प्रदीप कुमार को एमडी बनाया गया है। पूर्व में हुए घोटालों की अन्य जांच भी चल रही हैं।
- अरिमर्दन सिंह, एआर को-आपरेटिव
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