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अकाली दल पुनर-सुरजीत को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता चरणजीत बराड़ ने दिया इस्तीफा; सुखबीर बादल के खेमें में जाने की अटकलें

deltin33 2026-1-14 23:27:19 views 461
  

चरणजीत बराड़ ने अकाली दल पुनर-सुरजीत से इस्तीफा दिया



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने बुधवार को मुक्तसर में पार्टी की एक रैली के दौरान एक बार फिर से आह्वान किया कि पंजाब को बचाने की चाह रखने वाले सभी लोगों से शिरोमणि अकाली दल के झंडे के नीचे आ जाएं।

सुखबीर के इस बयान के थोड़ी देर बाद ही उनके करीबी रहे, लेकिन बाद में पार्टी को छोड़कर शिरोमणि अकाली दल (SAD) पुनर-सुरजीत में चले गए चरणजीत बराड़ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, बराड़ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह वापस शिरोमणि अकाली दल में जा रहे हैं या उनकी राह कोई और है।

लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर शिरोमणि अकाली दल पुनर-सुरजीत के टूटने की शुरूआत हो गई है। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता मनप्रीत अयाली ने भी कहा था कि वह अकाली दल पुनर-सुरजीत के साथ नहीं हैं।

दरअसल, जब से शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर अकाली नेताओं ने अकाली दल पुनर-सुरजीत का गठन किया है, तभी से उनकी आपसी सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह की अध्यक्षता में अगस्त 2025 में बनी पार्टी अभी तक लोगों में शिरोमणि अकाली दल का विकल्प बनने का कार्यक्रम नहीं दे सकी है। यही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में आपसी सहमति भी नहीं बन रही है यहां तक कि दफ्तर कहां होगा, इसको लेकर भी अलग-अलग विचार हैं।

बता दें कि पार्टी ने अपना पहला दफ्तर चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में बनाया था, लेकिन बाद में यह फैसला लिया गया कि पार्टी का मुख्य दफ्तर अमृतसर में होगा। अब पता चला है कि पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता रवि इन्द्र सिंह दफ्तर को मोहाली में ले गए हैं, लेकिन किसी भी दफ्तर में चरणजीत सिंह बराड़ की सेवाएं नहीं ली गई, जो कि शिरोमणि अकाली दल में लंबे समय तक दफ्तर के प्रभारी रहे हैं।

बराड़ बीते अक्टूबर महीने से ही पार्टी में सक्रियता छोड़ गए थे। बराड़ ने इस्तीफे में कहा कि अपने हाथों से घर बनाने के बाद छोड़ना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि कोई चारा नहीं बचा है। मुझे एहसास है कि पांच सदस्यीय रिक्रूटमेंट कमेटी के जरिये जो रिक्रूटमेंट हुई, उसके लिए दिन-रात काम किया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह शिरोमणि अकाली दल ने सैद्धांतिक तौर पर बड़ी गलतियां की थीं, जिसकी वजह से मेरे परिवार ने शुरू से ही बादल परिवार से राजनीतिक व परिवारिक संबंध तोड़ दिए थे। पार्टी प्रधान के साथ भले ही सोच में फर्क था, लेकिन इज्जत में कोई कमी नहीं आई है।
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