अगले साल शिवहर-सीतामढ़ी के बीच दौड़ेगी ट्रेन, पूरा होगा दशकों पुराना सपना
नीरज, शिवहर। सबकुछ ठीक-ठाक रहेगा तो अगले साल शिवहर में पटरी बनकर तैयार हो जाएगी और पटरी पर ट्रेन भी दौड़ने लगेगी। इसके साथ ही लोगों का दशकों पुराना सपना सच में साकार हो जाएगा। शिवहर-सीतामढ़ी विशेष रेलमार्ग परियोजना अगले साल धरातल पर उतर जाएगी। 28 किमी लंबी रेलमार्ग में सीतामढ़ी जिले के क्षेत्र में पड़ने वाले भाग में ट्रैक निर्माण के लिए टेंडर निकाल दिया गया है। वहीं, काम भी शुरू कर दिया गया है, लेकिन शिवहर में अब तक महज 20 प्रतिशत भूमि ही अधिग्रहित हो सकी है।
शिवहर में मंद रफ्तार से भू-अर्जन की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, रेलवे व भू अर्जन विभाग भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी कर युद्ध स्तर पर काम कराने की तैयारी में जुट गई है। जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से कैंप का आयोजन कर रैयतों की समस्या का समाधान कराया जा रहा है।
वहीं, भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। सांसद लवली आनंद दिल्ली में लगातार रेलवे अधिकारियों से जल्द से जल्द काम कराने की मांग कर रही है। रेलवे भी अब एक्शन मोड में आ गया है।
इसी बीच आरटीआई के जवाब में रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर कुमार शानू राज ने बताया है कि जनवरी 2027 में इस रेलमार्ग का निर्माण पूरा करा लिया जाएगा।
आरटीआई कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा को भेजे गए जवाब में डिप्टी चीफ इंजीनियर कुमार शानू राज ने बताया है कि सीतामढ़ी के रेवासी सेक्शन में इस रेलखंड का टेंडर जारी किया गया है। अवार्ड जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अन्य सेक्शन में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जरी है। वहीं, बताया है कि जनवरी 2027 तक इस रेलखंड का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के इस जवाब के बाद इलाके के लोगों में खुशी है।
आरटीआई कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि पूर्व में रेलवे द्वारा पांच साल में इस परियोजना के पूर्ण होने की जानकारी दी गई थी। इससे लोगों में मायूसी थी। उन्होंने बताया कि डिप्टी चीफ इंजीनियर कुमार शानू राज द्वारा दी गई जानकारी और शिवहर जिलाधिकारी प्रतिभा रानी की भू-अर्जन कराए जाने की प्रक्रिया में तेजी लाए जाने के बाद अब लगने लगा है कि शिवहर में एक साल के भीतर रेलमार्ग का निर्माण हो जाएगा।
जिला भू अर्जन पदाधिकारी अनुराग कुमार रवि ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा भू-अर्जन की प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। शीघ्र ही प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। अब तक दो मौजों के लोगों की कागजी त्रुटियों का समाधान कर लिया गया है। एक मौजा का लंबित रह गया है। जिसका 16 जनवरी को निष्पादन करा लिया जाएगा।
अभी 80 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण होना शेष:
शिवहर-सीतामढ़ी विशेष रेलमार्ग परियोजना के तहत शिवहर में महज 20 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है। 80 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण लटका है। शिवहर में भूमि अधिग्रहण करने के लिए 127 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया गया था। जिसमें से 83 करोड़ रुपये से भूमि अधिग्रहण किया गया है।
अधिग्रहण के लिए पांच करोड़ रुपये की फाइल तैयार है। कुल 184 एकड़ जमीन अधिगृहित करना था। इसमें से अब तक 35 एकड़ ही जमीन अधिग्रहित हो पाई है। खाते में अब 39 करोड़ रुपये शेष बचे है। साथ ही रेलवे मंत्रालय से 107 करोड़ और रुपये की डिमांड की गई है। जो प्रक्रियाधीन है।
18 साल पूर्व मिली थी स्वीकृति:
बताते चलें कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने वर्ष 2006-2007 में सीतामढ़ी वाया शिवहर मोतिहारी तक रेलमार्ग की स्वीकृति प्रदान की थी, लेकिन सर्वे बाद परियोजना सर्वे से आगे नहीं निकल सकी। इधर, शिवहर में रेलमार्ग निर्माण को लेकर आंदोलन होते रहे। रेलवे ने इसे घाटे का सौदा बताकर रेलमार्ग के निर्माण करने से हाथ खड़े कर दिए।
इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा ने लगातार आरटीआई लगाकर परियोजना को जिंदा रखा। शहर में पोस्टर लगाए। धरना दिया। बाद में मुकुंद प्रकाश मिश्रा ने पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार व रेलवे को तलब किया। इसी बीच तत्कालीन सांसद रमा देवी ने भी प्रयास तेज कर दिया।
तत्कालीन सांसद के प्रयास के बाद मार्च 2023 में रेलवे ने सीतामढ़ी-शिवहर-मोतिहारी रेलमार्ग परियोजना में से 28 किमी शिवहर-सीतामढ़ी परियोजना की स्वीकृति प्रदान की। वहीं, इसके लिए 583 करोड़ रुपये आवंटित भी किए। इसके बाद वर्तमान सांसद ने इस रेलमार्ग का निर्माण तेज गति से कराने के लिए संसद में सवाल उठाए। रेलमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा, जबकि डीएम प्रतिभा रानी की पहल पर अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आई हैं। |
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