नई दिल्ली जनपथ रोड पर कुत्तों को खाना खिलाता व्यक्ति। जागरण आर्काइव
जागरण टीम, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्ते के काटने के हर दिन सैकड़ों लोग शिकार बनते हैं, लेकिन इन मामलों में कार्रवाई न के बराबर ही होती है। हां कोई मामला तूल पकड़ ले या सुर्खियों का हिस्सा बन जाए तो पुलिस अपनी जान बचाने के लिए जरूर मुकदमा दर्ज कर लेती है।
अभी तक आवारा कुत्ते के काटने पर निगम अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई हो ऐसा सामने नहीं आया है। जबकि दिल्ली समेत एनसीआर के निकायों और प्राधिकरण में आवारा कुत्तों के बंध्याकरण से लेकर उनके टीकाकरण की जिम्मेदारी के लिए अलग से विभाग हैं और अधिकारी भी तैनात हैं। न तो इनकी जवाबदेही तय हुई हैं और न ही इन पर कार्रवाई हुई है।
चुनिंदा सरकारी अस्पतालों के आंकड़े कर रहे हैरान
हैरानी की बात है कि एनसीआर में पांच लाख से ज्यादा लोग हर वर्ष कुत्तों के काटने के शिकार होते हैं। यह आंकड़ा चुनिंदा सरकारी अस्पतालों का है अगर, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो यह संख्या दोगुनी हो सकती है।
दिल्ली की बात करें तो अकेले एमसीडी के इलाके में ही 60 हजार औसतन प्रतिवर्ष आवारा कुत्तों के काटने के शिकार होकर लोग एमसीडी के अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में टीकाकरण के लिए पहुंचते हैं।
वहीं, केंद्र और राज्य सरकार के अस्पतालों के डाटा उपलब्ध हो तो यह मामला कई गुणा हो सकता है। इसी प्रकार गाजियाबाद में ही हर साल 1.38 लाख, हापुड़ में 1.81 लाख, गौतमबुद्व नगर में 1.71 लाख, फरीदाबाद में 18500, सोनीपत में 11500 मरीज कुत्तों के काटने के शिकार होने पर टीकाकरण के लिए पहुंचे।
इतनी बड़ी मात्रा में लोग कुत्तों के काटने के शिकार बन रहे हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में सख्त नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए स्थान तय किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। वहीं, खूंखार कुत्तों को शेल्टर होम में रखने की तैयारी चल रही है। इसके लिए शेल्टर होम भी कुत्तों के लिए बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जरूर हो जुर्माना, लोगों की आर्थिकी होती है प्रभावित
वर्ष 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 58.9 लोग वह हैं जो किसी काम से एक स्थान पर गए और वह आवारा कुत्ते के काटने के शिकार हो गए। सफदरजंग अस्पताल में आए 360 लोगों पर हुए अध्यन में यह बात सामने आई।
इसमें वह लोग थे जो घरेलू सहायिका और सामान की डिलीवरी वाले लोग थे। इन लोगों को सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण के लिए पूरा दिन खराब होता है इससे उनका रोजगार और घरेलू बजट बिगड़ता है। ऐसे में मुआवजे का प्रविधान होने से लोगों को राहत मिलेगी।
एफआईआर पर नहीं होती कोई कार्रवाई
दिल्ली में पिछले साल आवारा कुत्तों के काटने की दो बड़ी एफआईआर हुई हैं। इसमें पूठकलां इलाके में छवि नाम की बच्ची को कुत्ते ने काटा तो उसकी रेबीज से मौत हो गई थी। स्वजनों ने एमसीडी अधिकारियों पर लापरवाही का मामला दर्ज कराया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू की है जिसका परिणाम हैं कि कोर्ट सख्त होकर आदेश दे रहा है। एक अन्य एफआईआर एक पालतू कुत्ते द्वारा एक व्यक्ति को काटने की एफआईआर हुई थी। रोहिणी में हुई एफआईआर में भी कोई कार्रवाई आगे की नहीं हुई है।
कुत्तों के काटने की घटनाएं
वर्ष घटनाएं मौत
2023
57173
-
2024
58526
-
2025
60222
-
नोट 2025 का आंकड़ा सितंबर तक का है
गाजियाबाद
वर्ष लोगों को काटा
2025
1.38 लाख
2024
दो लाख से अधिक
2023
71 हजार से अधिक
- नोएडा में वर्ष 2024 में एक बच्चे की मौत रेबीज से हुई थी। वर्ष 2023 में भी एक व्यक्ति की मौत रेबीज से हुई थी।
- हापुड़ में वर्ष 2025 में 181247 लोगों को कुत्तों ने काटा। वर्ष 2025 में रेबीज से 15 मौत हुईं। एक वर्ष में रेबीज से हुईं 15 मौत हुई। वहीं, वर्ष 2024 में नौ लोगों की रेबीज से मौत हुई जबकि 1,67,745 लोगों को कुत्तों ने काटा था।
- गौतमबुद्ध नगर में वर्ष 2025 में 1,78,295 लोगों को कुत्तों ने काटा और 2024 में 145137 लोगों को कुत्तों ने काटा। हालांकि
- कुत्तों के काटने से एक भी मौत नहीं हुई।
- फरीदाबाद में 18500 कुत्ते काटे जाने के मामले आए और सोनीपत में वर्ष 2025 में 11500 कुत्ते काटने के मामले आए।
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