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गाजियाबाद में संचार नेस्ट सहकारी आवास समिति के खिलाफ हाईकोर्ट में दो कैविएट दाखिल, करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला

LHC0088 2026-1-13 22:56:41 views 1096
  

वेव सिटी स्थित संचार नेस्ट आवास समिति की पाम हाइट्स सोसायटी। जागरण



जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। वेव सिटी में उच्च स्तरीय जांच में संचार नेस्ट सहकारी आवास समिति द्वारा करोड़ों के घोटाले के पर्दाफाश होने के बाद आवास विकास परिषद (आविप) द्वारा फ्लैटों के क्रिय-विक्रय पर रोक लगाने और खातों को संचालन रोकने के मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में दो कैविएट दाखिल की गई हैं।

पीड़ितों को अंदेशा है कि आरोपित कार्रवाई को रोकने के लिए कोर्ट जा सकता है और स्टे ले सकता है। कैविएट का मतलब है कि पीड़ित पक्ष ने अदालत को यह सूचित कर दिया है कि किसी मामले में एकतरफा कोई आदेश न दिया जाए।
क्या है पूरा मामला?

आविप के अधिकारियों के मुताबिक समिति के पदाधिकारियों ने अवैध रूप से 506 फ्लैट बना दिए। समिति के सदस्यों ने लंबे समय से फ्लैटों की रजिस्ट्री न किए जाने, अनाधिकृत रूप से वृद्धि शुल्क लगाए जाने और समिति पदाधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायतें दर्ज कराई थीं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा 23 दिसंबर 2025 ने उप आवास आयुक्त/उप निबंधक, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ से मामले की जांच कराई।

जांच अधिकारी द्वारा 30 दिसंबर 2025 को जांच रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक समिति पदाधिकारियों द्वारा वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। समिति के फ्लैटों को अवैध रूप से ओपन मार्केट में बेचा गया। समिति सदस्यों के फ्लैटों की रजिस्ट्री से संबंधित स्टांप ड्यूटी की धनराशि का उपयोग फ्लैट निर्माण में कर दिया गया। जांच के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने सहयोग नहीं किया।

समिति सचिव ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। अपर आवास आयुक्त/अपर निबंधक, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ दीपक सिंह ने समिति के अभिलेखों के अभिग्रहण का आदेश जारी किया है। आदेश के तहत सतीश कुमार, सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद को अधिग्रहणकर्ता अधिकारी नामित किया गया है।

पीड़ित पक्ष के सतीश चंद्र गुप्ता ने बताया कि आशंका है कि इस कार्रवाई के खिलाफ आरोपित कोर्ट से स्टे ले सकता है। गीता नेगी और अशोक अग्रवाल द्वारा ओर हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। अब यदि कोर्ट में आरोपित जाता है तो पीड़ित पक्ष को सुने बिना अदालत एकतरफ फैसला नहीं देगी। वहीं पीड़ित पक्ष का कहना है कि आविप ने समिति का कार्यालय सील कर दिया है लेकिन आरोपित ने ज्यादातर अभिलेख दफ्तर से बाहर रखे हैं।

  


100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला होने का अनुमान है। हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। बैनामी संपत्तियों का विवरण जुटा लिया गया है। समिति के बही-खाते और अभिलेखों को पुलिस बल के साथ जब्त किया जाएगा।
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सतीश द्विवेदी, आवास विकास परिषद के हाउसिंग ऑफिसर
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