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हिम चंडीगढ़ शहर बसाने के विरोध में दो पंचायतों के किसानों ने भरी हुंकार, बसंतपुर के लोग क्यों जता रहे आपत्ति?

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हिम चंडीगढ़ शहर बसाने के विरोध में जुटे लोग। जागरण  



संवाद सहयोगी, बद्दी (सोलन)। हिमाचल सरकार की ओर से सोलन में बद्दी के निकट शीतलपुर में नया शहर बसाने का लोगों ने विरोध किया है। सरकार की घोषणा के बाद मंगलवार को किसानों ने दूसरे दौर की बैठक मलपुर पंचायत के भुड्ड गांव में रखी। बैठक में किसानों ने दो टूक कह दिया कि हम अपनी जमीनें किसी भी कीमत पर नहीं देंगे, चाहे इसके लिए उनको कितना ही संघर्ष करना पड़े।

मलपुर के उपप्रधान गुरदास चंदेल, गुरनाम सिंह, संडोली के पूर्व प्रधान भाग सिंह व मलकूमाजरा के हेमराज चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि किसानों की जीवन रेखा हरित पट्टी को उजाड़कर राज्य सरकार का शहर बसाने का फैसला गलत है।
हजारों पेड़ कटेंगे

हेमराज ने कहा कि हजारों पेड़ काटकर सरकार कौन से पर्यावरण का संरक्षण कर रही है, यह समझ से परे है। जब एनएच बनने पर पेड़ कटे तो बद्दी का तापमान एक डिग्री बढ़ गया और अगर हजारों पेड़ कटेंगे तो हमारा क्या होगा।
गरीब किसान कहां जाएंगे

गुरदास चंदेल ने कहा कि यहां के लोगों का जीवन बसर खेती है और दूध बेचकर गुजारा होता है और अगर खेत ही सरकार ने सस्ते खरीद कर बिल्डरों को बेच दिए तो गरीब किसान कहां जाएंगे।
किसानों की सहमति बिना अधिग्रहण मंजूर नहीं

संडोली के पूर्व प्रधान भाग सिंह कुंडलस ने कहा कि किसानों की सहमति के बिना कोई जमीन शहर बसाने के लिए अधिग्रहित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम शहर बसाने व विकास के विरुद्ध नहीं हैं, पर किसानों की सहमति भी जरूरी होनी चाहिए और बात तर्कसंगत होनी चाहिए।
विधायक से भी मिले ग्रामीण

इसी बीच बद्दी के निकट हिम चंडीगढ़ नाम से नया शहर बसाने के विरोध में दो पंचायतों हरिपुर संडोली, मलपुर व अन्य गांवों के लोग दून के विधायक रामकुमार चौधरी से उनके आवास पर मिले। किसानों ने विधायक से कहा कि बढ़ते परिवारों के बीच अब हर परिवारों में दो-दो, तीन-तीन बीघा जमीन ही बची है और इनके पास अन्य कोई जमीन भी नहीं है। ऐसे में जो चंद पैसे मिलेंगे वो कुछ दिनों में समाप्त हो जाएंगे और उसके बाद लोग दर-दर की ठोकरें खाएंगे।

शीतलपुर में अधिकांश परिवारों का काम दूध बेचना है। जब निजी जमीनों के साथ समस्त सरकारी व शामलात जमीनें अधिग्रहण हो जाएंगी तो पशुओं का चारा कहां से आएगा। सरकारी जमीनों के जाने के बाद पशुओं के चरांद समाप्त हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनके हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
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