जागरण संवाददाता, प्रयागराज। माघ मेला के दो महत्वपूर्ण स्नान पर्व मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर रूट डायवर्जन की कार्ययोजना बना ली गई है। दोनों प्रमुख स्नान पर्वों के बीच सिर्फ दो दिनों का अंतर होने के चलते मेला प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है।
मकर संक्रांति के स्नान का मुहूर्त 15 जनवरी को है, फिर भी परंपरागत स्नान 14 जनवरी को भी होने की उम्मीद है। ऐसे में मंगलवार से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। 13 जनवरी की रात आठ बजे से भारी वाहनों को नो इंट्री प्वाइंट पर रोक दिया जाएगा।
यह व्यवस्था 19 जनवरी की रात 12 बजे तक लागू रहेगी। भारी वाहनों को जिले की सीमा में प्रवेश करने से पहले डायवर्जन वाले मार्गों पर मोड़ दिया जाएगा। निरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि आवश्यक सेवाओं व एंबुलेंस वाहनों के लिए डायवर्जन लागू नहीं रहेगा।
दिल्ली व कानपुर से वाराणसी जाने वाले भारी वाहन फतेहपुर के बक्सर मोड़ (शुक्ला ढाबा के पास) बक्सर गंगापुल चंद्रिका देवी मंदिर बक्सर गंगापुल लालगंज (रायबरेली) गुरुबक्शगंज ढकिया चौराहा, लालगंज अझारा प्रतापगढ़, भोपियामऊ, रानीगंज, मुंगराबादशाहपुर, मछली शहर, जौनपुर जलालपुर, फूलपुर, बाबतपुर एयरपोर्ट, हरहुआ से वाया रिंग रोड वाराणसी जाएंगे।
वापसी का भी यही मार्ग होगा। फतेहपुर से बांदा व रीवां जाने वाले भारी वाहन चौड़गरा चौराहा से बिंदकी, बंधवा तिराहा, ललौली, चिल्ला होते हुए बांदा की ओर वाहन भेजे जाएंगे। वापसी भी इसी मार्ग से होगी।
लखनऊ,रायबरेली व प्रतापगढ़ से वाराणसी जाने वाले भारी वाहन फतेहपुर से डलमऊ, रायबरेली से ऊंचाहार, सलोन, लालगंज प्रतापगढ़, भूपियामऊ चौराहा, रानीगंज, मुंगराबादशाहपुर, जौनपुर होते हुए वाराणसी जाएंगे। वापसी मार्ग भी यही रहेगा। कौशांबी से वाराणसी जाने वाले भारी वाहन कोखराज-नवाबगंज बाईपास सोरांव बाईपास, हंडिया बाईपास, औराई वाराणसी में प्रवेश करेंगे।
लखनऊ से मछली शहर जाने वाले भारी वाहन मुंशीगंज सलोन रोड रायबरेली, लालगंज अझारा प्रतापगढ़, रानीगंज, मुंगराबादशाहपुर मछली शहर जाएंगे। वापसी का मार्ग भी यही होगा। रीवां से फतेहपुर जाने वाले भारी वाहन नारीबारी से बांये मुड़कर शंकरगढ़, मऊ, कर्वी, बांदा से बिंदकी फतेहपुर की तरफ जाएंगे।
वापसी भी इसी मार्ग से होगी। मेलाधिकारी ऋषि राज के अनुसार माघ मेला के प्रमुख स्नान पर्वों मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं। दोनों स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। मेला के प्रमुख मार्गों, पांटून पुलों से लेकर स्नान घाटों तक सभी प्रबंध कर लिए गए हैं। |