एंटीबायोटिक्स एंटीबायोटिक्स कैसे बिगाड़ती हैं पेट का संतुलन? (Image Source: AI-Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एंटीबायोटिक्स ने बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों से लड़कर अनगिनत जानें बचाई हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल कभी-कभी हमारे शरीर, खासकर हमारी गट हेल्थ के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
डॉ. अमरीश साहनी (एसोसिएट डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड डाइजेस्टिव डिजीज, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल) बताते हैं कि हमारे पेट में ट्रिलियंस बैक्टीरिया, वायरस और फंगी रहते हैं, जिन्हें \“गट माइक्रोबायोम\“ कहा जाता है। यह पाचन, इम्युनिटी, विटामिन बनाने और यहां तक कि मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत जरूरी हैं।
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पेट का संतुलन बिगड़ना
एंटीबायोटिक्स का सबसे बड़ा असर \“डिस्बायोसिस\“ के रूप में होता है, जिसका मतलब है पेट के बैक्टीरिया में असंतुलन।
- ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स का खतरा: ऐसी एंटीबायोटिक्स जो कई तरह के बैक्टीरिया को मारती हैं, वे सबसे ज्यादा नुकसान करती हैं। ये पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की पूरी आबादी को खत्म कर सकती हैं, जिससे उनकी विविधता कम हो जाती है।
- तेजी से होता है असर: यह बदलाव बहुत तेजी से होता है, अक्सर इलाज शुरू होने के कुछ दिनों के अंदर ही।
- लंबे समय तक प्रभाव: क्लिंडामाइसिन जैसी कुछ एंटीबायोटिक्स पेट के बैक्टीरिया में लंबे समय तक रहने वाले बदलाव कर सकती हैं, जिससे प्रतिरोधी बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिल जाता है।
डायरिया और पाचन की समस्याएं
एंटीबायोटिक्स का एक बहुत ही आम दुष्प्रभाव है \“एंटीबायोटिक-एसोसिएटेड डायरिया\“।
कितना आम है?
एंटीबायोटिक्स लेने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है।
क्यों होता है?
अच्छे बैक्टीरिया के कम होने से पाचन बिगड़ जाता है और Clostridium difficile जैसे हानिकारक बैक्टीरिया टॉक्सिन्स बनाने लगते हैं।
- लक्षण: पेट में ऐंठन, मतली, गैस और दस्त। यह इसलिए होता है क्योंकि फाइबर का पाचन सही से नहीं हो पाता और आंतों में पानी सोखने की प्रक्रिया बदल जाती है।
- गंभीर मामले: अगर ध्यान न दिया जाए, तो यह कोलाइटिस या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है।
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लंबे समय तक रहने वाले खतरे
सिर्फ तुरंत होने वाली परेशानियां ही नहीं, एंटीबायोटिक्स का असर लंबे समय तक रह सकता है:
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: बार-बार एंटीबायोटिक्स लेने से पेट में ऐसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं जिन पर दवाओं का असर नहीं होता। इससे भविष्य में संक्रमण का इलाज करना मुश्किल हो सकता है।
- मेटाबॉलिज्म पर असर: माइक्रोबायोम में बदलाव से पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
- बच्चों पर प्रभाव: बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। बचपन में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल उनके जीवन भर की पेट की सेहत को प्रभावित कर सकता है, जिसका संबंध एलर्जी या मोटापे जैसी समस्याओं से हो सकता है।
गट हेल्थ को कैसे करें ठीक?
अच्छी खबर यह है कि हमारा पेट काफी लचीला होता है और समय के साथ ठीक हो सकता है, हालांकि इसमें हफ्तों या महीनों लग सकते हैं। रिकवरी के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं:
- सही डाइट: लहसुन, प्याज और केले जैसे \“प्रीबायोटिक\“ फाइबर से भरपूर चीजें खाएं।
- फर्मेंटेड फूड्स: दही या किमची जैसे फर्मेंटेड फूड्स लें, जो शरीर में प्रोबायोटिक्स पहुंचाते हैं।
- सप्लीमेंट्स: प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स पेट में अच्छे बैक्टीरिया को वापस लाने में मदद कर सकते हैं। ध्यान रहे, इन्हें एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा होने के बाद लेना चाहिए ताकि दवा का असर कम न हो।
- हाइड्रेशन: खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
- सावधानी: वायरल बीमारियों (जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम) के लिए एंटीबायोटिक्स न लें। इनका इस्तेमाल तभी करें जब बहुत जरूरी हो।
एंटीबायोटिक्स जरूरी हैं, लेकिन इनका असर हमारी पेट की सेहत पर गहरा होता है। समझदारी इसी में है कि हम इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करें।
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