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बिहार में स्लीपर बसों के मॉडिफिकेशन पर परिवहन मंत्री सख्त, परमिट हो सकता है रद

Chikheang Yesterday 20:26 views 597
  

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)



राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में स्लीपर बसों के संचालन और उनके निर्माण व संशोधन (माडिफिकेशन) पर परिवहन मंत्री श्रवण कुमार सख्त हो गए हैं।

उन्होंने दो टू शब्दों में कहा है कि बसों का अनाधिकृत मॉडिफिकेशन कराया गया तो ऐसी स्थिति में परिवहन विभाग द्वारा जारी परमिट रद कर दिया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि बीते दिनों में कटिहार भ्रमण के दौरान प्राप्त शिकायतों और जांच के आधार पर पाया गया है कि कई बसें सीटर के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद मिक्स्ड सीटर-स्लीपर कॉन्फिगरेशन में चल रही हैं। ऐसी बसों का परमिट रद किया जाएगा।

ऐसा करना केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 126 और एआईएस-119 व एआईएस-052 मानकों के अनुरूप नहीं है। स्लीपर बसों का निर्माण, निरीक्षण और संचालन एआईएस-119 व एआईएस-052 के अनुसार ही किया जा सकता है।

श्रवण कुमार ने कहा कि स्लीपर बसों में आपातकालीन निकास, निर्धारित बर्थ आकार (1800एमएम लंबाई, 600एमएम चौड़ाई), फायर रेसिस्टेंस और बस का प्रोटोटाइप जांच एजेंसी द्वारा प्रमाणित होना चाहिए। फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट जारी करने से पहले वाहन की वास्तविक बॉडी कॉन्फिगरेशन की जांच भी अनिवार्य है।

कई ओवरनाइट बसें बिहार से अंतरराज्यीय रूट पर एसी सीटर परमिट के साथ मोडिफाइड स्लीपर मोड में चल रही हैं, जिससे फायर, ओवरलोडिंग व आपातकालीन निकास ब्लाक होने की आशंका रहती है।

ऐसे मामले खासतौर पर कटिहार सिल्लीगुड़ी रूट पर चलने वाली बसों में पाए गए है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो भी सीटर बसें स्लीपर में परिवर्तित करके पाई जाएंगी, उनके परमिट तुरंत रद किए जाएंगे।

साथ ही, उल्लंघन करने वाले ऑपरेटरों, आरटीओ अधिकारियों और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियां ही बना सकेंगी स्लीपर बस

हाल के दिनों में स्लीपर बसों में लगी आग की घटनाओं के बाद सख्त नए नियमों बनाए गए है। परिवहन मंत्री ने कहा कि स्लीपर बसें अब केवल मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त फैक्टरियों में ही बनाई जाएंगी।

लोकल या अनधिकृत बॉडी बिल्डर्स अब स्लीपर कोच नहीं बना सकेंगे। हर स्लीपर बस में फायर डिटेक्शन सिस्टम अनिवार्य होगा। ड्राइवर की नींद या थकान का पता लगाने के लिए एआई सेंसर और ड्राउजिनेस इंडिकेटर लगाना जरूरी, जो ड्राइवर को तुरंत अलर्ट करेगा। अगर ड्राइवर सो जाए तो तुरंत अलार्म बजेगा।

इमरजेंसी एग्जिट के लिए हैमर, इमरजेंसी लाइट्स, स्पष्ट एग्जिट दरवाजे और मल्टी-पाइंट एग्जिट अनिवार्य। मौजूदा स्लीपर बसों में भी रेट्रोफिटिंग करनी होगी, जिस्म फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट हैमर, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम लगाना होगा।
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