शिमला के जुन्गा में जला क्योंथल रियासत का वर्षों पुराना राजमहल। जागरण
संवाद सूत्र, जुन्गा (शिमला)। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला में जुन्गा स्थित वर्षों पुराने राजमहल में गत बुधवार को आग लग गई। आग लगने से क्षतिग्रस्त हुए तत्कालीन क्योंथल रियासत के प्राचीन राजमहल से मलबा निकालने के दौरान देवता जुन्गा सहित अन्य देवताओं के मोहरे (मूर्तियां) मिले हैं। यह अग्निकांड में पूर्ण रूप से पिघलकर गोले बन गए हैं।
बीते बुधवार को इस राजमहल में आग लग गई थी। इसमें राजमहल का एक हिस्सा अग्निकांड में क्षतिग्रस्त हो गया था और इसी हिस्से में क्योंथल रियासत के आराध्य देवता जुन्गा का मुख्य मंदिर था, जो इस अग्निकांड में दब गया था। हालांकि राजमहल में लगी आग को अग्निशमन, पुलिस, होमगार्ड और स्थानीय लोगों की मदद से पूर्ण रूप से बुझा दिया गया।
रियासत के सैकड़ों लोग जुटे थे मूर्तियां ढूंढने में
बीते तीन दिनों से क्योंथल रियासत के सैकड़ों लोग इस राजमहल के मंदिर से मूर्तियों की खोज करने में जुटे रहे। आखिरकार शनिवार को मंदिर में रखी सभी देवताओं के मोहरे क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले हैं।
रियासत की राजमाता पहुंची पुराने राजमहल
अग्निकांड में दबे देवता जुन्गा मंदिर व मूर्तियों की खोज करने के लिए की गई कार सेवा में राजमाता विजय ज्योति सेन और राजा खुश विक्रम सेन स्वयं मौजूद रहे। इस भीष्ण अग्निकांड से क्योंथल रियायात की प्रजा की ऐतिहासिक धरोहर को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है।
देवता का बेशकीमती खजाना भी जला
राजमहल के भीतर देवता जुन्गा के मंदिर और मूर्तियों के अतिरिक्त देवता का बेशकीमती खजाना भी अग्निकांड में पूर्णरूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। इस मंदिर के नवनिर्माण के लिए शीघ्र ही बैठक में मंथन किया जाएगा, ताकि क्योंथल क्षेत्र की इस ऐतिहासिक धरोहर का पुनः जीर्णोद्धार किया जा सके।
200 नहीं 800 साल पुराना था राजमहल
राजमाता विजय ज्योति सेन ने कहा कि यह राजमहल 200 वर्ष नहीं अपितु 800 वर्ष पुराना है, परंतु इसे गलत तरीके से उजागर किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। राजमहल तत्कालीन क्योंथल रियासत के 22 टीका और 18 ठकुराईयों की प्रमुख धरोहर थी। जिसका संरक्षण करना क्योंथल क्षेत्र की प्रजा का नैतिक दायित्व है। आग लगने का कारण अभी तक पता नहीं लग पाया है।
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