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आस्ट्रिया से डिपोर्ट दो दोस्तों ने बस और ट्राली को बनाया फूड प्वाइंट, हौसले की नई मिसाल पेश

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यूरोप से डिपोर्ट होकर अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा।  



जागरण संवाददाता, कपूरथला। अमेरिका के बाद अब यूरोप में भी इमिग्रेशन नियमों की सख्ती बढ़ने के कारण ‘डिपोर्ट’ शब्द पंजाबियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। डिपोर्ट होने के बाद कई युवक अवसाद में चले जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो विपरीत हालातों को अपनी नई शुरुआत का आधार बनाते हुए जीवन को फिर से पटरी पर ले आते हैं।

कपूरथला के दो युवा जसप्रीत सिंह घुम्मन निवासी नूरपुर जनूहां और परमजीत सिंह उर्फ सोनू निवासी कोट गोबिंदपुर, ऐसी ही मिसाल बने हैं। तीन माह पहले आस्ट्रिया से डिपोर्ट होकर लौटे इन युवकों ने नकारात्मक शब्द को सकारात्मक पहचान में बदलते हुए दो अनोखे स्टार्टअप शुरू किए हैं। जसप्रीत ने एक डबल डैकर बस को ‘इयू डिपोर्टेड पीजा वाला’ नाम देकर ऑन-व्हील फूड प्वाइंट के रूप में विकसित किया है।

बस की ऊपरी मंजिल पर बैठने की सुविधा और नीचे किचन बनाया गया है। यह बस 2026 के नए साल से कपूरथला के मॉल रोड स्थित चौपाटी के पास संचालित होगी। उधर, परमजीत सिंह सोनू ने खेतों के ट्रैक्टर-ट्राली को ही ‘आस्ट्रिया डिपोर्टेड पीजा वाला’ नाम के फूड प्वाइंट में बदल दिया है, जो जालंधर-कपूरथला रोड पर मंसूरवाल के पास नजर आएगा। सोनू ने 10 जनवरी से अपने स्टार्टअप का संचालन शुरू कर दिया है।

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बताया क्यों चुना डिपोर्ट शब्द

दैनिक जागरण से बातचीत में जसप्रीत ने बताया कि एमबीए चाय वाला और फिजिक्स वाला जैसे नामों से प्रेरित होकर उन्होंने ‘डिपोर्ट’ शब्द को ही अपनी पहचान बना लिया। यूरोप से कंट्री आउट होने के बाद भारत लौटकर उन्होंने अपने परिवार की मदद से लगभग 17 लाख रुपये खर्च कर इस डबल डैकर फूड प्वाइंट को तैयार किया। आस्ट्रिया में वे फूड डिलीवरी के काम में थे, जिसका अनुभव अब नए बिजनेस में भी काम आ रहा है।

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भारत लौटने पर आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया

वहीं, परमजीत ने बताया कि यूरोप जाने में लाखों रुपये खर्च हो चुके थे, इसलिए भारत लौटते ही आत्मनिर्भर बनने का फैसला लिया। दोनों युवकों ने कहा कि डिपोर्ट होने के बाद हार मानने के बजाय हुनर पर भरोसा कर मेहनत करने से जीवन में नई राह निकलती है। उन्होंने अन्य युवाओं को संदेश दिया कि निराश होने के बजाय अपने कौशल को पहचानकर आगे बढ़ें।

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