चोट, सर्जरी व बीमारी से बाल गंवा चुके लोगों को मिली राहत। सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बाल झड़ने की समस्या जहां आम तौर पर सौंदर्य से जुड़ी मानी जाती है, वहीं कुछ रोगियों के लिए यह गंभीर मानसिक और सामाजिक संकट का कारण बन जाती है। खासकर वे लोग, जिनके बाल चोट, आग, सर्जरी या गंभीर बीमारियों के कारण स्थायी रूप से नष्ट हो जाते हैं, उनके लिए अब तक शहर में कोई प्रभावी समाधान नहीं था।
ऐसे रोगियों के लिए एम्स के त्वचा रोग विभाग ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। विभाग ने हेयर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्थायी रूप से नष्ट हो चुके बालों को दोबारा जीवन देना शुरू कर दिया है।
स्कारिंग एलोपेसिया से पीड़ित रोगियों में फालिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की उन्नत सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक ऐसे सात रोगियों का सफल हेयर ट्रांसप्लांट किया जा चुका है, जिनके बाल लाइकेन प्लैनोपिलारिस (ऐसी बीमारी जिसमें त्वचा काली पड़कर गलने लगती है), सर्जरी के बाद बने दागों, चोट या जलने के कारण स्थायी रूप से नष्ट हो गए थे।
डर्मेटोलाजिस्ट डा. सुनील कुमार गुप्ता के अनुसार, स्कारिंग एलोपेसिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें बालों की जड़ें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं। इस अवस्था में बालों का दोबारा उगना स्वाभाविक रूप से संभव नहीं होता। इसके चलते रोगियों को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक, सामाजिक और सौंदर्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में हेयर ट्रांसप्लांट को अत्यंत जटिल प्रक्रिया माना जाता है, क्योंकि इसके लिए रोग की पूर्ण स्थिरता, सही रोगी चयन और उच्च स्तर की विशेषज्ञता आवश्यक होती है।
शहर के एक 28 साल के युवक को लाइकेन प्लैनोपिलारिस बीमारी हो गई थी। उसके सिर की त्वचा काली पड़कर गलने लगी थी, बाल झड़ गए थे। युवक एम्स पहुंचा तो डाक्टरों ने पहले दवा देकर उसकी बीमारी नियंत्रित की। उसके बाद दो बार में उसका हेयर ट्रांसप्लांट किया गया है। पीछे के कुछ बाल बचे हुए थे, वहां से बाल लेकर बीच सिर व अगल-बगल प्रत्यारोपित किया गया।
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इसी तरह पड़राैना की एक 22 साल की युवती आग से जल गई थी, इस वजह से उसके सिर से बाल खत्म हो गए थे। उसका भी इसी विधि से हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। इस तरह अब तक सात लोगों के बालों को नया जीवन दिया जा चुका है।
डर्मेटोलाजी विभाग ने हेयर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में नया व महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इससे ऐसे रोगियों की उम्मीदें बढ़ी हैं जो किसी कारणवश अपने बाल स्थायी रूप से खो चुके थे। एम्स रोगियों के हित में बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। -
-डा. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक एम्स।
जटिल और अब तक असाध्य माने जाने वाले बाल एवं स्कैल्प रोगों का भी समाधान अब गोरखपुर में संभव हो गया है। अब ऐसे रागियों को उपचार के लिए बड़े महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्हें उन्नत उपचार यही उपलब्ध हो सकेगा। -
-डा. सुनील कुमार गुप्ता, प्रोफेसर डर्मेटोलाजी विभाग, एम्स। |