search

Magh Snan 2026: माघ स्नान के समय करें ये काम, मिलेगा मां गंगा का आशीर्वाद

cy520520 The day before yesterday 13:26 views 385
  

Magh Snan 2026: माघ स्नान के समय करें ये काम।



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ महीना को मोक्ष और शुद्धि का द्वार माना गया है। साल 2026 में माघ का पवित्र महीना 4 जनवरी से 1 फरवरी तक रहेगा। इस दौरान किसी भी पवित्र नदी, विशेषकर मां गंगा के तट पर स्नान करने का फल अश्वमेध यज्ञ के समान माना जाता है। हर व्यक्ति के लिए प्रयागराज या हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में अगर आप घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर श्रद्धापूर्वक \“गंगा चालीसा\“ का पाठ करते हैं, तो आपको वही पुण्य मिलता है, जो गंगा तट पर जाने से मिलता है। इसलिए इस दौरान (Magh Snan 2026) रोजाना देवी की विधिवत उपासना करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।

  
॥गंगा चालीसा॥ (Ganga Chalisa Lyrics)
॥ दोहा ॥

जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग।

जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥
॥ चौपाई ॥

जय जय जननी हराना अघखानी।आनंद करनी गंगा महारानी॥

जय भगीरथी सुरसरि माता।कलिमल मूल डालिनी विख्याता॥

जय जय जहानु सुता अघ हनानी।भीष्म की माता जगा जननी॥

धवल कमल दल मम तनु सजे।लखी शत शरद चन्द्र छवि लजाई॥

वहां मकर विमल शुची सोहें।अमिया कलश कर लखी मन मोहें॥

जदिता रत्ना कंचन आभूषण।हिय मणि हर, हरानितम दूषण॥

जग पावनी त्रय ताप नासवनी।तरल तरंग तुंग मन भावनी॥

जो गणपति अति पूज्य प्रधान।इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना॥

ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥

साथी सहस्र सागर सुत तरयो।गंगा सागर तीरथ धरयो॥

अगम तरंग उठ्यो मन भवन।लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन॥

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता।धरयो मातु पुनि काशी करवत॥

धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी।तरनी अमिता पितु पड़ पिरही॥

भागीरथी ताप कियो उपारा।दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥

जब जग जननी चल्यो हहराई।शम्भु जाता महं रह्यो समाई॥

वर्षा पर्यंत गंगा महारानी।रहीं शम्भू के जाता भुलानी॥

पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो।तब इक बूंद जटा से पायो॥

ताते मातु भें त्रय धारा।मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा॥

गईं पाताल प्रभावती नामा।मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी।कलिमल हरनी अगम जग पावनि॥

धनि मइया तब महिमा भारी।धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥

मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।धनि सुर सरित सकल भयनासिनी॥

पन करत निर्मल गंगा जल।पावत मन इच्छित अनंत फल॥

पुरव जन्म पुण्य जब जागत।तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥

जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥

महा पतित जिन कहू न तारे।तिन तारे इक नाम तिहारे॥

शत योजन हूं से जो ध्यावहिं।निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं॥

नाम भजत अगणित अघ नाशै।विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे॥

जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।धर्मं मूल गंगाजल पाना॥

तब गुन गुणन करत दुख भाजत।गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥

गंगहि नेम सहित नित ध्यावत।दुर्जनहूं सज्जन पद पावत॥

उद्दिहिन विद्या बल पावै।रोगी रोग मुक्त हवे जावै॥

गंगा गंगा जो नर कहहीं।भूखा नंगा कभुहुह न रहहि॥

निकसत ही मुख गंगा माई।श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥

महं अघिन अधमन कहं तारे।भए नरका के बंद किवारें॥

जो नर जपी गंग शत नामा।सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥

सब सुख भोग परम पद पावहीं।आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥

धनि मइया सुरसरि सुख दैनि।धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥

ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।सुन्दरदास गंगा कर दासा॥

जो यह पढ़े गंगा चालीसा।मिली भक्ति अविरल वागीसा॥
॥ दोहा ॥

नित नए सुख सम्पति लहैं,धरें गंगा का ध्यान।

अंत समाई सुर पुर बसल,सदर बैठी विमान॥

संवत भुत नभ्दिशी,राम जन्म दिन चैत्र।

पूरण चालीसा किया,हरी भक्तन हित नेत्र॥

यह भी पढ़ें- Magh Month 2026: राहु और शनि दोष से हैं परेशान? तो माघ माह में करें इन खास चीजों का दान

यह भी पढ़ें- Gupt Navratri 2025: कब से शुरू हो रहे हैं माघ माह के गुप्त नवरात्र, यहां पढ़ें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

410K

Threads

0

Posts

1410K

Credits

Forum Veteran

Credits
145395

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com