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वेदांता चेयरमैन के बेटे का निधन, रिकवरी के बीच आया कार्डियक अरेस्ट; इलाज के बीच भी क्यों रहता है खतरा?

cy520520 2026-1-8 10:26:43 views 905
  

सिर्फ हार्ट डिजीज ही नहीं है कार्डियक अरेस्ट की वजह (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे, अग्निवेश अग्रवाल, का अमेरिका में निधन हो गया है। एक स्कीइंग दुर्घटना के बाद न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जिसके दौरान कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) की वजह से उनकी मौत हो गई।  

जब कोई व्यक्ति किसी बड़े हादसे से उबर रहा होता है, तब अचानक ऐसी स्थिति आना हर किसी को डरा देता है। आइए समझते हैं कि आखिर कार्डियक अरेस्ट क्या है और यह किन कारणों (Causes of Cardiac Arrest) से रिकवरी के दौरान आ सकता है।
क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?

कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है या इतनी तेजी से धड़कता है कि वह ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इसमें व्यक्ति अचानक गिर जाता है और बेहोश हो जाता है। क्योंकि इसके लक्षण बिना किसी चेतावनी के आते हैं, इसलिए डॉक्टर इसे \“सडन कार्डियक अरेस्ट\“ भी कहते हैं।

जब दिल ब्लड पंप करना बंद कर देता है, तो शरीर के अंगों (खासकर दिमाग) को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। ऐसे में अगर कुछ मिनटों में  इलाज न मिले, तो यह स्थिति घातक हो सकती है।

  

(Picture Courtesy: Freepik)
रिकवरी के दौरान कार्डियक अरेस्ट क्यों आ सकता है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि अस्पताल में इलाज के दौरान हार्ट बीट कैसे रुक सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, चोट के मरीजों में कार्डियक अरेस्ट हमेशा दिल की बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि अन्य शारीरिक जटिलताओं के कारण होता है-

  • हैमरेज- शरीर के अंदर या बाहर बहुत ज्यादा खून बह जाने से ब्लड कम हो जाता है, जिससे दिल काम करना बंद कर सकता है।
  • सांस लेने में कठिनाई- छाती में चोट या सांस की नली में रुकावट के कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
  • दिल पर सीधा असर- अगर दुर्घटना में छाती पर गहरी चोट लगी हो, तो इससे दिल की मांसपेशियों या मुख्य ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे दिल की धड़कन का संतुलन बिगड़ जाता है।

क्या है कार्डियक अरेस्ट की असली वजह?

हमारे हृदय की धड़कन बिजली के संकेतों (Electrical Impulses) से चलती है। कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब ये संकेत अचानक असामान्य और तेज हो जाते हैं। इसे एरिथमिया कहा जाता है। इसका सबसे खतरनाक रूप \“वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन\“ है, जिसमें दिल के निचले हिस्से से बेतरतीब संकेत निकलने लगते हैं और धड़कन रुक जाती है।
क्या हैं इसके लक्षण?

हालांकि कार्डियक अरेस्ट बिना चेतावनी के आता है, लेकिन कुछ मरीजों में ये लक्षण दिख सकते हैं-

  • बेहोश हो जाना या चक्कर आना
  • सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ
  • दिल की धड़कन तेज होना  
  • कमजोरी, मतली या उल्टी महसूस होना।

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में क्या करें?

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। इसलिए सबसे पहले मेडिकल हेल्पलाइन पर कॉल करें और तुरंत सीपीआर शुरू करें।  
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Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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