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सांकेतिक तस्वीर
केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। एसकेएमसीएच में तीन महीने से आपरेशन के इंतजार में एक मरीज की जान चली गई। आर्थो वार्ड में बेड संख्या 21 पर भर्ती विरेंद्र कुमार सिंह की मौत बुधवार की शाम अचानक तीबयत बिगड़ने से हो गई। विरेंद्र सिंह की मौत के बाद आक्रोशित स्वजन ने एसकेएमसीएच प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार की शाम विरेंद्र कुमार शाम को उन्हें ठंड से कंपकंपी हुई। वार्ड में जब उनकी तबियत बिगड़ने लगी तब कोई भी नर्सिंग स्टाफ नहीं थी। विरेंद्र सिंह के हालत को देख वार्ड में भर्ती अन्य मरीज के स्वजन उन्हें लेकर इलाज के लिए लेकर इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सक ने विरेंद्र सिंह का बेड हेड टिकट मांगा।
जब तक नर्सिंग स्टाफ ने बेड हेड टिकट की खोजबीन की, तब तक विरेंद्र सिंह की मौत हो गई। विरेंद्र सिंह की मौत से गुस्साए अन्य भर्ती मरीजों के स्वजन ने बताया कि दोपहर और रात में रेगुलर मोड में नर्सिंग स्टाफ नहीं रहती हैं। रात में तो डयूटी में पहुंचने के बाद नर्सिंग सुई लगाकर गायब हो जाती हैं। इलाज के लिए बुलाकर लाना पड़ता है।
तीन महीना पूर्व ही किया गया था भर्ती
मृतक के स्वजन ने बताया कि विरेंद्र सिंह का तीन माह पूर्व सड़क दुर्घटना में पैर टूट गया था। उन्हें इलाज के लिए एसकेएमसीएच लाया गया। इमरजेंसी में चिकित्सक इलाज करने के बाद वार्ड संख्या चार में डा. अरुण कुमार के यूनिट में भर्ती किया था। रोज चिकित्सक आज-कल कहकर लौटा दे रहे थे। लंबे समय से अस्पताल में भर्ती रहने के कारण वह बीमार होने लगे थे।
बुधवार की शाम उनकी तबियत बिगड़ने लगी। वार्ड में एक भी नर्सिंग स्टाफ नहीं थी। विरेंद्र सिंह की हालत को देख वार्ड में भर्ती अन्य मरीज के स्वजन उन्हें लेकर इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। इसी बीच उनकी मौत हो गई। उपाधीक्षक डा. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य कर्मियों को डयूटी स्थल नहीं छोड़ने के सख्त आदेश पहले से ही दिए गए हैं। वार्ड संख्या चार में अक्सर नर्सिंग स्टाफ डयूटी से गायब होने का मामला सामने आ रहा है। मामले को लेकर नर्सिंग स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगी जाएगी। हास्पिटल मैनेजर से नर्सिंग डयूटी स्थल की जांच कर दोषी नर्सिंग स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आपरेशन के लिए आंदोलन के लिए उकसाने का आया था मामला
हड्डी विभाग में भर्ती खरहर के रामबचन झा समेत अन्य मरीज एक- दो माह से आपरेशन करवाने की प्रतीक्षा में भर्ती हैं, लेकिन आपरेशन करने के बजाय चिकित्सक उन्हें आंदोलन करने की नसीहत दे रहे हैं। पीड़ित मरीजों का स्वजन ने मंगलवार को चिकित्सक डा. सेराज पर आरोप लगाते हुए अधीक्षक से शिकायत किया था कि जब उन्होंने आपरेशन में देरी पर गुहार लगाई, तो चिकित्सक ने कहा- धरना-प्रदर्शन करो, अनशन पर बैठो। जिसको वोट दिया है, उससे पैरवी कराओ या कलक्टर से कहलाओ, तभी आपरेशन होगा।
स्पलायर के हाथ खड़ा करने से मरीजों का बाधित हो रहा आपरेशन
आर्थो विभाग के अधिकतर मरीज आयुष्मान योजन के तहत भर्ती हैं। इनमें बारह मरीज का पैर फैक्चर है। कुल 22 मरीज भर्ती हैं। अस्पताल में राड, स्टील समेत अन्य सामाग्री सप्लाई नहीं होने के कारण आयुष्मान योजन के तहत भर्ती मरीजों को आपरेशन करवाने में परेशानी होती है। अगर भर्ती मरीज बाहर से सामान खरीदकर लाते हैं तो उनका आपरेशन कर दिया जाता है।
उपाधीक्षक डा. सतीश कुमार सिंह ने बताया कि इन सामानों के सप्लाई के लिए एजेंसी बहाल है। इसका लोकल रेट तय है, लेकिन कम रेट होने के कारण एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके बाद सप्लाई बंद कर दिया है। हालाकि, दो दिन पूर्व एचओडी समेत विभाग के चिकित्सकों के साथ अधीक्षक ने सप्लायर संघ के साथ बैठक की। इसके बाद सप्लाई पर सहमति बनी है। अगर जल्द सामान का सप्लाई नहीं करते हैं तो टेंडर रद्द करके क्रय समिति के तहत समाग्री खरीदारी की जाएगी। |
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