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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, 1888 में बने भवन की हालत पर लिया संज्ञान

LHC0088 4 day(s) ago views 984
  

शिमला स्थित 1888 में बना एडवांस स्टडी भवन।  



विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला की ऐतिहासिक विरासतों के रखरखाव में लापरवाही पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार सहित नगर निगम शिमला को जनहित से जुड़े मामले पर नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने वाइस रीगल लाज, जिसे वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडी के नाम से जाना जाता है, की दयनीय हालत पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि इस ऐतिहासिक स्थल के रखरखाव में क्या अड़चन आ रही है। कोर्ट ने इमारत की दयनीय हालत पर चिंता जाहिर की।
कोर्ट को बताया तीन भूमिगत मंजिलों का नहीं रख रखाव

इमारत के कुछ हिस्से आम जनता और पर्यटकों के लिए खुले हैं, जबकि कुछ हिस्से बंद हैं। कोर्ट को बताया गया कि इमारत की तीन भूमिगत मंजिलों का रखरखाव नहीं किया गया है। कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं जैसे ऐतिहासिक घंटा चोरी हो चुका है जिसका आज तक पता नहीं चला।  
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश

कोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक टाउनहाल में हाई एंड कैफे खोल कर इसके ऐतिहासिक स्वरूप में बदलाव करने और इसके रखरखाव से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात यह आदेश दिए। इस इमारत को लेकर नगर निगम शिमला और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए।
टाउनहाल में फूड कोर्ट के संचालन का मामला

कोर्ट को बताया था कि पहले भी हाई कोर्ट ने टाउनहाल शिमला में फूड कोर्ट के संचालन पर 10 जनवरी 2024 को पारित फैसले के तहत रोक लगाई थी और फूड कोर्ट संचालक देवयानी इंटरनेशनल कंपनी को आदेश दिए थे कि टाउनहाल में फूड कोर्ट का संचालन न करे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सशर्त याचिका वापस ले ली थी जिस कारण यह अंतरिम आदेश भी रद हो गया था।

इसके बाद फिर से इसका संचालन शुरू हो गया। एक बार फिर से इसके ऐतिहासिक स्वरूप से छेड़छाड़ को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।  
शहर का ऐतिहासिक स्थल

टाउनहाल शिमला शहर का ऐतिहासिक स्थल है। इसे हाल ही में एशियन विकास बैंक के सहयोग से भारी खर्चा कर पुनर्निर्मित किया गया।  
विरासत स्थल हमेशा अनमोल

कोर्ट ने कहा कि विरासत स्थल हमेशा अनमोल होते हैं। प्राचीन युग की साक्षी रही हेरिटेज बिल्डिंग एक खजाना है, इसलिए इसे सार्वजनिक ट्रस्ट में माना जा सकता है। इस विरासत को विरासत के लिए संरक्षित करना होगा।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम शिमला ने प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल व अवशेष अधिनियम 1958, टीसीपी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए इस विरासत संपत्ति को हाई एंड कैफे में बदलने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने शिमला में पैदल चलने वाले रास्तों की संख्या बढ़ाने के बजाय इन्हें घटाने पर भी चिंता जाहिर की। कोर्ट ने शिमला डेवलेपमेंट प्लान 2041 में शिमला शहर के ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखने को लेकर बनाए प्रविधानों के कार्यान्वयन पर भी राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले पर सुनवाई 19 मार्च को होगी।
सांस्कृतिक धरोहर है एडवांस्ड स्टडी

यह इमारत शिमला की सांस्कृतिक धरोहर है। ब्रिटिश काल की तुलना में आज भी आकार में सबसे बड़ी और स्काटिश शैली की यह इमारत लार्ड डफरिन के शासनकाल में 1884 से 1888 के बीच बनाई गई थी। भारतीय स्वतंत्रता तक यह वाइस रीगल लाज के रूप में उपयोग में रही। इसके बाद राष्ट्रपति भवन बनने पर इसे भारत सरकार को सौंपा गया। 1965 में इसे शिक्षा मंत्रालय ने अपने अधीन लिया और यहां इंडियन इंस्टीट्यूट आफ की स्थापना की। यह इमारत 1888 से 1947 तक शाही सरकार का केंद्र रही। भारतीय विभाजन से पहले स्वतंत्रता की ओर अग्रसर कई महत्वपूर्ण सम्मेलन और बैठकें इसी इमारत में हुईं। 1945 में शिमला सम्मेलन और 1946 में शिमला कैबिनेट मिशन इस भवन में आयोजित ऐतिहासिक बैठकें थीं।

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