\“मिशन मंझरिया\“ के अंतर्गत गांव में पढ़ाई करतीं गांव की महिलाएं। एमपीपीजी
डाॅ. राकेश राय, गोरखपुर। गरीबी उन्मूलन केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि सतत प्रयास और सामाजिक सहभागिता से संभव है। इसका जीवंत उदाहरण है गोरखपुर के जंगल धूसड़ स्थित महाराणा प्रताप महाविद्यालय के बीएड विभाग द्वारा संचालित ‘मिशन मंझरिया’। वर्ष 2018 में शुरू हुआ यह अभिनव माडल आज शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तीकरण को एक सूत्र में पिरोते हुए ग्रामीण विकास की सशक्त मिसाल बन चुका है। महाविद्यालय द्वारा गोद लिए गए मंझरिया गांव के 178 गरीब परिवारों के 843 लोगों को इस मिशन के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
बीएड के छात्र प्रतिदिन दोपहर दो बजे से शाम बजे तक गांव में शिक्षण कार्य करते हैं। कक्षा एक से दस तक के बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाकर उनके व्यक्तित्व का विकास करते हैं। शिक्षा के इस अभियान ने बच्चों को आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया, जो गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ने की पहली शर्त है। महिलाओं को साक्षर बनाकर मिशन ने सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत नींव रखी है।
निरक्षर महिलाओं को शिक्षित करने के साथ-साथ सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबन की राह दिखाई है। आम का स्क्वैश, जैम, अचार जैसे उत्पाद बनाकर महिलाएं अब आय अर्जित कर रही हैं। वर्ष 2024 में 46 महिलाओं को निश्शुल्क सिलाई मशीन देकर आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिली, जिससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े प्रयास भी मिशन का अहम आधार बने हैं। साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविरों से अब तक 28 हजार से अधिक ग्रामीण लाभान्वित हो चुके हैं।
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वहीं, नियमित श्रमदान और स्वच्छता जागरूकता ने गांव की जीवनशैली बदल दी है। पौधारोपण अभियान ने पर्यावरण के प्रति चेतना को जगा दी है। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, \“मिशन मंझरिया\“ आत्मनिर्भर गांव से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम है। बीएड विभागाध्यक्ष शिप्रा सिंह का कहना हैं कि यह माडल अब आसपास के अन्य गांवों में लागू करने की तैयारी है। |
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