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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन गई है। शिक्षा निदेशालय के हालिया आकलन में 129 सरकारी स्कूलों को जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया है।
रिपोर्ट में कई स्कूलों में कक्षाएं टूटे-फूटे कमरों में चल रही हैं, 16 स्कूल आज भी टिन की छतों वाले अस्थायी ढांचों में संचालित हो रहे हैं और सात स्कूलों में शौचालय ब्लाक, मल्टीपर्पज हाल और गार्ड रूम जर्जर स्थिति में पाए गए।
अधिकारियों ने बताया कि नौ स्कूलों में कक्षाएं सीधे तौर पर छात्रों के लिए खतरनाक हैं, जबकि 68 स्कूलों में एक या अधिक भवन ब्लाक तत्काल मरम्मत या नए निर्माण के लिए चिन्हित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई जगह केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा और असुरक्षित भवनों को गिराकर नए सिरे से निर्माण करने की आवश्यकता है।
सेफ्टी ऑडिट कराने का प्रस्ताव तैयार
इस स्थिति को देखते हुए निदेशालय ने सभी स्कूल भवनों का बुनियादी और सेफ्टी ऑडिट कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। ऑडिट के दौरान भवनों की संरचनात्मक मजबूती, इलेक्ट्रिकल फिटिंग, कक्षाओं और मल्टीपर्पज हाल की स्थिति, खेल सुविधाओं और समग्र स्कूल माहौल का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन स्कूलों में मरम्मत संभव है और किन स्थानों पर नए भवनों का निर्माण करना होगा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से अटकी निर्माण और नवीनीकरण परियोजनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उनके मुताबिक सरकार 75 स्कूलों को सीएम श्री स्कूल के रूप में अपग्रेड करने की योजना पर भी काम कर रही है। मई 2025 में दिल्ली कैबिनेट की मंजूरी के बाद शिक्षा मंत्री ने इन स्कूलों में मरम्मत, अपग्रेडेशन, फेसलिफ्टिंग और सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए हैं।
आधुनिक सुविधाओं का होगा विस्तार
इन स्कूलों में बेहतर फर्नीचर, आधुनिक सुविधाएं और खेल व लाइब्रेरी जैसी संरचनाओं का भी विस्तार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सीएम श्री स्कूलों की संख्या बढ़ सकती है, जिसके लिए अतिरिक्त एजेंसियों को अपग्रेडेशन कार्य सौंपा जाएगा। सरकारी स्कूलों में बढ़ते छात्र दबाव को कम करने के लिए नए स्कूलों का निर्माण भी प्रस्तावित है।
योजना के तहत हर साल 10 नए स्कूल बनाए जाने हैं और 2029 तक 50 नए स्कूल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न भूमि एजेंसियों द्वारा आवंटित करीब 70 खाली प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। मौजूदा स्कूल परिसरों में खाली जमीन का इस्तेमाल अतिरिक्त कक्षाएं, नए भवन, खेल सुविधाएं, मल्टीपर्पज हाल, लाइब्रेरी और प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा।
वहीं, निदेशालय दो पालियों में चल रहे स्कूलों को एकल पाली में बदलने पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल 799 सरकारी स्कूलों में से 284 स्कूल सुबह और शाम दो पाली में संचालित हो रहे हैं। |