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हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ: दूषित पेयजल से झारखंड के मुख्यमंत्री के जिले साहिबगंज में हाहाकार, इंदौर जैसी आशंका

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डिहारी गांव में आर्सेनिक युक्त पेयजल की आपूर्ति। (प्रतीकात्मक फोटो)



जागरण संवाददाता, साहिबगंज। इंदौर में हाल ही में जहरीला और मल मिश्रित पानी (Indore Contaminated Drinking Water Incident) पीने से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ऐसी ही भयावह स्थिति झारखंड के साहिबगंज में भी बनती नजर आ रही है, जहां आर्सेनिक युक्त दूषित पानी पीने से लगातार लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है, बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई का अभाव चिंता बढ़ा रहा है।

  

साहिबगंज जिले के सदर प्रखंड के डिहारी गांव के लोग दो दशक से भी अधिक समय से आर्सेनिक युक्त पेजयल पीने को मजबूर हैं। अब तक सौ से अधिक लोग कैंसर सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। कुछ लोगों की मौत गंभीर बीमारी की चपेट में आने से हो चुकी है तो कुछ का इलाज चल रहा है।

साहिबगंज का यह हाल तब है जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यहां का नेतृत्व करते हैं। इसी जिले के बरहेट से हेमंत सोरेन विधायक हैं। डिहारी गांव में दूषित पानी पीने से किसी का दांत पीला हो गया तो किसी की हड्डी कमजोर हो गयी। यहां के अधिकतर लोग गरीब व किसान वर्ग के हैं। इतना पैसा नहीं कि बाहर जाकर इलाज करा सकें। पांच साल पहले इस गांव में छह स्थानों पर आर्सेनिक युक्त जल को फिल्टर करने के लिए टंकी बनाई गई।

जिला प्रशासन के साथ कंपनी का एमओयू खत्म होने के बाद मरम्मत के अभाव में खराब हो गया है। सक्षम लोग डिब्बाबंद पानी खरीदकर पी लेते हैं पर गरीब आज भी मजबूरी में चापाकल का पानी पी रहे हैं। स्थिति को देखते हुए कई लोग यहां से पलायन कर दूसरी जगह बस गए। कोई साहिबगंज तो कोई मिर्जाचौकी में शिफ्ट कर गए। कोई भी लड़की वाला यहां अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता है।
लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना से थोड़ी बहुत मिली राहत

करीब एक दशक पूर्व यहां पेयजल आपूर्ति के लिए मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना बनायी गई। टेंडर भी हुआ लेकिन आज तक वह पूर्ण नहीं हुआ। पिछले साल दोबारा उसका टेंडर हुआ है। इधर, डीएमएफटी से वहां लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना की शुरूआत की गई है।

दिसंबर 2025 में उपायुक्त हेमंत सती ने लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना से डिहारी में घर घर पेयजल योजना की शुरूवात की लेकिन अभी गांव के शत-प्रतिशत लोगों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं मिल रहा है। इस योजना के तहत रक्सी स्थान में बोरिंग कराई गई है। वहां से पाइप लाइन के माध्यम गांव में पानी लाया जा रहा है।

पानी स्टोर के लिए गांव के शुरूवात में कालीमंदिर के पास एक बड़ा संप बनाया गया है जहां पानी का स्टोर किया जाता है। यहां से बने चार टंकी में पानी पहुंचाकर घर घर में पाइप के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। उपायुक्त ने उद्घाटन के दिन निरीक्षण में कहा कि खेत से आने वाले पाइप को बदल दिया जाएगा। हालांकि अब तक उसे बदला नहीं गया है।

ग्रामीण ज्ञानचंद यादव, राज बहादुर यादव, सुभाष, छोटू, नागेश्वर, रीता देवी, निर्मला देवी, शुभम कुमार, बमबम कुमार रक्सी स्थान से शुद्ध पेयजल फिलहाल मिल रहा है लेकिन पानी की रफ्तार काफी धीमी है। एक बाल्टी पानी भरने में काफी समय लग जाता है। जिला प्रशासन चाहिए कि इस दिशा में और अधिक कार्य करे। रक्सी स्थान से आने वाले भूमिगत पाइप फट जाने से कभी कभी गंदा पानी भी आ रहा है। इतना बड़ा गांव में दो तीन टंकी की व्यवस्था और अधिक होनी चाहिए।  

डिहारी गांव में फिलहाल आर्सेनिक मुक्त पेयजल की व्यवस्था कर दी गई है। ग्रामीणों को कुछ असुविधा हो रही है तो इस दिशा में उपायुक्त से वार्ता कर निदान किया जाएगा। लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत हुए कार्य में कुछ सुधार होना है।-शशि शेखर सिंह, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी
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