Sakat Chauth 2026: सकट चौथ व्रत कथा।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Sakat Chauth 2026: हिंदू धर्म में सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। साल 2026 में यह पावन व्रत 6 जनवरी यानी आज मनाया जा रहा है। शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी व्रत का फल तभी पूरा मिलता है, जब उसकी पौराणिक कथा का पाठ किया जाए। ऐसे में सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की पूजा के बाद \“सकट चौथ व्रत कथा\“ का पाठ करें या फिर सुनें, क्योंकि तभी व्रत पूरा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो माताएं इस कथा को सुनती हैं, उनके बच्चों पर आने वाले सभी संकट गणपति बप्पा हर लेते हैं। आइए इस व्रत की महिमा को जानते हैं।
सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth 2026 Vrat Katha)
सकट चौथ को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। आइए इनमें से एक के बारे में जानते हैं, जो इस प्रकार है - बहुत समय पहले एक शहर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन पकाने की भट्टी लगाई, लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी बर्तन नहीं पके। परेशान होकर वह राजा के पास गया। राजा ने पंडितों से पूछा, तो उन्होंने कहा कि \“\“हर बार आवा लगाते समय एक बच्चे की बलि देनी होगी, तभी बर्तन पकेंगे\“\“।
राजा की आज्ञा से बलि की प्रक्रिया शुरू हो गई। एक बार एक बुढ़िया माई के इकलौते बेटे की बारी आई। वह बुढ़िया बेहद गरीब थी और उसका वही एक सहारा था। उस दिन सकट चौथ का दिन था। बुढ़िया ने अपने बेटे को गणेश जी का प्रतीक यानी एक सुपारी और तिल दिया और कहा कि \“\“बेटा, संकटहर्ता गणेश जी का ध्यान करना, वे तुम्हारी रक्षा करेंगे।“
बच्चे को आवे में बिठा दिया गया और आग लगा दी गई। बुढ़िया पूरी रात गणेश जी की पूजा करती रही। अगले दिन जब कुम्हार ने आवा खोला, तो वह दंग रह गया। आवा के सारे बर्तन तो पक गए थे, लेकिन बुढ़िया का बेटा जीवित और सुरक्षित बैठा था। साथ ही, अन्य जिन बच्चों की पहले बलि दी गई थी, वे भी जीवित हो गए। तभी से इस दिन को सकट चौथ के रूप में मनाया जाने लगा और माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए यह व्रत रखने लगीं।
क्यों महत्वपूर्ण है कथा का पाठ?
सकट चौथ का अर्थ ही है संकटों को काटने वाली चतुर्थी\“। ऐसा माना जाता है कि इस कथा का पाठ करने से विपत्ति कितनी ही बड़ी क्यों न हो, अगर आपको बप्पा पर विश्वास अटल है, तो वे आपकी रक्षा जरूर करेंगे। इसके साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है।
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